दिल्ली में आयोजित कूटनीति-आधारित विचार-विमर्श के बीच RBI गवर्नर संजय माल्होत्रा ने कहा कि हमें अतीत के भारी ऋण और एनपीए के प्रभावों से उबरने में एक दशक से अधिक लग गया, और अब भी सतर्क रहना जरूरी है। उनके अनुसार वैश्विक व्यवस्था पर तनाव बना हुआ है, भू-राजनीतिक विभाजन, व्यापार प्रतिबंध और आपूर्ति-संक्रमण जैसी घटनाओं का पूर्वानुमान कठिन है। इन बिंदुओं के साथ उन्होंने अवसर और जोखिम दोनों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। 2026 के कूटिल्या इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के मंच से यह टिप्पणी उन्होंने साझा की। इस साक्षात्कार में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते परिदृश्य के बीच भारतीय नीति बनाने के संतुलन पर ज़ोर दिया और मौजूदा समय की अनिश्चितताओं के बीच नियंत्रण बनाए रखने पर बल दिया। सुप्रीम कोर्ट के टॉपिक-प्रासंगिक धाराओं या सरकारी विरासत से जुड़े अन्य विवरण इस लेख के दायरे में शामिल नहीं हैं। आगे के समय में बाजार सहभागियों को सतर्क रहने, संरचनात्मक सुधारों के साथ निगरानी और प्रयोजन के साथ निर्णय लेने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
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RBI गवर्नर ने कॉन्टेम्प्ले से कहा: वैश्विक व्यवस्था पर दबाव, सतर्क रहें
दिल्ली स्थित कूटनीति शृंखला में केउटिलीया कॉन्फ्रेंस 2026 के दौरान RBI गवर्नर संजय माल्होत्रा ने बृहत्तर अंतरराष्ट्रीय क्रम के दबावों को रेखांकित किया। दो दशक से अधिक के कर्ज के बोझ से निपटने के अनुभव के साथ वे कहते हैं कि complacent होने का समय नहीं, स्थिति तेजी से बदलेगी और बाजारों पर असर पड़ेगा।

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सोर्स: मूल मीडिया









