दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक कन्क्लेव में आरबीआई के गवर्नर संजय माल्होत्रा ने वित्तीय स्थिरता पर केंद्रित चर्चा की। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता वित्तीय प्रणालियों की ऐसी क्षमता है जो आर्थिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाती है, लेनदेन को संभालती है और झटकों को सहती है, ताकि आर्थिक गतिविधियाँ सुरक्षित बनी रहें। साथ ही संस्थागत तंत्र और भारत के पास मौजूद औजारों पर उनका फोकस था, वैश्विक जोखिमों के बीच भारतीय वित्तीय ढांचे का आकलन कैसे किया जाता है, यह भी विषय रहा। मौजूदा समय में मौद्रिक नीति से जुड़ी विषय-वस्तुओं से बचते हुए उन्होंने MPC (मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी) की सातवीं तारीख को होने वाली बैठक की पंक्तियों का उल्लेख भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सम्मेलन में मौद्रिक नीति पर बात नहीं की जाएगी।