रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार रहने की बात कही, खासकर कलिनिनग्राद के मुद्दे पर। मॉस्को के अनुसार NATO की हालिया गतिविधियाँ और कलिनिनग्राद के पास घिरे रहने की स्थिति तनाव बढ़ाती हैं, ताकि रूसी प्रशासन का मानना है कि आवश्यकता पड़ने पर वह सभी हथियारों के इस्तेमाल पर विचार करेगा। पुतिन ने कहा कि रूस का उद्देश्य किसी भी यूरोपीय देश पर हमला नहीं है, पर सुरक्षा की दिशा में उठते कदमों का मजबूत जवाब देना होगा। कलिनिनग्राद, जो पोलैंड और लिथुआनिया से घिरा है, रूस का एक्सक्लेव क्षेत्र है और इसे रूस के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। NATO के अनुसार वे इलाके के बारे में खतरे की बात से इनकार करते हैं, जबकि रूस ने सुरक्षा कवच को तेज करने के लिए सैन्य तैयारियों को बढ़ाने की चेतावनी दी है। हालिया घटनाक्रमों में NATO के अभ्यासों को रूस ने चिंता के साथ देखा है, और सितंबर के अंत में मॉस्को ने भी चेतावनी दी थी कि अगर हवाई-समुद्री रास्तों से घेरेबंदी की कोशिश होगी तो जवाब दिया जाएगा। दूसरी तरफ, यूक्रेन युद्ध के बीच दोनों पक्षों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है, और रूस-यूक्रेन संघर्ष पांचवें साल में पहुंच गया है। पुतिन के अनुसार अगर सीधे हमले की नौबत आती है, खासकर कलिनिनग्राद और संभवतः अन्य क्षेत्रों पर, तो रूस के पास मौजूद सभी हथियारों के इस्तेमाल पर विचार किया जाना अनिवार्य हो सकता है। इस अवधि में पश्चिमी देश नाटो-यूरोपीय देशों और यूनाइटेड किंगडम पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे रूस के विरुद्धHybrid Warfare का सहारा ले रहे हैं, जिसमें साइबर और जासूसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं। कलिनिनग्राद के बारे में चर्चा को देखते हुए, यह क्षेत्र बर्लिन, वारसॉ, कोपेनहेगन और स्टॉकहोम जैसे शहरों तक रूस के सीधे पहुँच की रणनीतिक पंक्ति समझा जाता है। यूक्रेन युद्ध के साथ रूस की तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों के कारण ईंधन आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है, जिससे घरेलू बाजारों में तनाव दिखा है।