भारत और रूस के बीच माल ढुलाई के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर बातचीत आगे बढ़ रही है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वल्दाई फोरम में कहा कि मॉस्को अपने भारतीय दोस्तों के साथ इस कॉरिडोर के इस्तेमाल पर चर्चा कर रहा है।

यह रूट भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना मध्य एशिया और रूस तक पहुंच देता है। इसका मकसद भारत और रूस के बीच माल ढुलाई का समय और खर्च कम करना है। कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने पर यात्रा का समय लगभग आधा होने की उम्मीद जताई गई है।

INSTC क्या है और कैसे काम करता है

INSTC एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट रूट है। इसमें समुद्री बंदरगाहों के साथ रेल और सड़क मार्ग भी शामिल हैं। यह हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान के रास्ते कैस्पियन सागर से जोड़ता है। इसके बाद नेटवर्क रूस के रास्ते उत्तरी यूरोप तक पहुंचता है।

इस मार्ग की शुरुआत भारत के मुंबई से होती है। माल जहाज से ईरान के बंदर अब्बास और बंदर-ए-अंजली तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद कैस्पियन सागर पार करने के लिए जहाज या दक्षिणी रूस तक पहुंचने के लिए ट्रक और रेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। आगे यह नेटवर्क अस्त्रखान, मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग तक जाता है।

भारत को समय और लागत में कितना फायदा

INSTC की लंबाई 7,200 किलोमीटर है। इसे स्वेज नहर के पारंपरिक रास्ते की तुलना में 30% सस्ता और 40% छोटा बताया गया है। स्वेज नहर के रास्ते रूस तक माल पहुंचाने में आम तौर पर 40 से 60 दिन लगते हैं। INSTC से यही यात्रा 16 से 21 दिन में पूरी होने का दावा है।

कम यात्रा समय से भारतीय सामान को रूस, यूरोप और यूरेशियाई बाजारों तक पहुंचने में बढ़त मिल सकती है। इस नेटवर्क से कृषि और औद्योगिक निर्यात को मदद मिलने की उम्मीद है। यह भारत को लाल सागर और स्वेज नहर में होने वाली देरी और हमलों से अलग विकल्प भी देता है।

पुतिन ने क्या कहा

पुतिन ने बताया कि रूस चीन और दक्षिण कोरिया के साथ समुद्री सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक चीनी कंटेनर जहाज और एक दक्षिण कोरियाई जहाज का ट्रायल किया जा चुका है। भारत के साथ भी बातचीत चल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर केवल रूस पर निर्भर नहीं है। रूस अपने सहयोगियों को क्रेडिट रिसोर्स देने के लिए तैयार है, लेकिन ईरान को अपना काम पूरा करना होगा। कॉरिडोर का एक हिस्सा अजरबैजान से होकर गुजरता है। पुतिन के अनुसार, अजरबैजान इस व्यवस्था पर सहमत है और राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से संपर्क बना हुआ है।

किन देशों की भागीदारी है

रूस, भारत और ईरान ने INSTC विकसित करने के लिए 2002 में शुरुआती समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। 2005 में अजरबैजान भी इस परियोजना में शामिल हुआ। बाद में कुल 13 देशों ने समझौते को मंजूरी दी।

इस नेटवर्क से जुड़े देशों में भारत, रूस, ईरान, अजरबैजान, बेलारूस, बुल्गारिया, आर्मेनिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ओमान, ताजिकिस्तान, तुर्की और यूक्रेन शामिल हैं। परियोजना में मध्य एशिया, काकेशस और रूस के रास्तों की भी भूमिका है।

भारत ने इस कॉरिडोर को आगे बढ़ाने के लिए ईरान, रूस, मध्य एशियाई देशों और बुल्गारिया के बीच बैठकें आयोजित करने में भूमिका निभाई है। जुलाई 2022 में INSTC के जरिए पहली कमर्शियल खेप भेजी गई थी।

आगे की चुनौती क्या है

कॉरिडोर को पूरी तरह चालू करने के लिए अलग-अलग देशों में बुनियादी काम पूरा होना जरूरी है। ईरान से जुड़े हिस्से और अजरबैजान होकर गुजरने वाला मार्ग इसकी प्रगति में अहम हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों के कारण सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

# INSTC का मुख्य उद्देश्य क्या है?

INSTC का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच माल ढुलाई का समय और खर्च कम करना है।

# INSTC भारत को पाकिस्तान से कैसे अलग रास्ता देता है?

यह मार्ग भारत से ईरान, कैस्पियन सागर और रूस तक जाता है। इसलिए भारत को मध्य एशिया और रूस पहुंचने के लिए पाकिस्तान से गुजरना नहीं पड़ता।

# INSTC से माल पहुंचाने में कितना समय लग सकता है?

स्वेज नहर के रास्ते 40 से 60 दिनों के मुकाबले INSTC से यात्रा 16 से 21 दिन में पूरी होने का दावा है।

# INSTC कितना सस्ता और छोटा बताया गया है?

इस कॉरिडोर को स्वेज नहर के रास्ते की तुलना में 30% सस्ता और 40% छोटा बताया गया है।

# INSTC में भारत की क्या भूमिका है?

भारत ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित देशों के बीच बैठकें आयोजित करने में भूमिका निभाई है।

# INSTC पर पहली कमर्शियल खेप कब भेजी गई थी?

इस कॉरिडोर के जरिए पहली कमर्शियल खेप जुलाई 2022 में भेजी गई थी।

निष्कर्ष

INSTC भारत को रूस, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने वाला वैकल्पिक माल परिवहन नेटवर्क देता है। इसकी प्रगति ईरान और अजरबैजान से जुड़े काम तथा क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों पर निर्भर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. INSTC का पूरा नाम क्या है?

INSTC का पूरा नाम इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर है।

Q. INSTC किन माध्यमों से माल पहुंचाता है?

इसमें समुद्री जहाजों के साथ रेल और सड़क मार्गों का इस्तेमाल होता है।

Q. INSTC किन शहरों को जोड़ता है?

यह मार्ग मुंबई से शुरू होकर बंदर अब्बास, बंदर-ए-अंजली, अस्त्रखान, मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग तक जाता है।

Q. INSTC से किन क्षेत्रों तक पहुंच बनती है?

यह नेटवर्क भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र, मध्य एशिया, रूस और उत्तरी यूरोप से जोड़ता है।

Q. INSTC में सबसे अहम मौजूदा जरूरत क्या है?

ईरान से जुड़े काम को पूरा करना और अजरबैजान से गुजरने वाले हिस्से को आगे बढ़ाना इसकी अहम जरूरत है।