24 अगस्त को बारिश शुरू होने के कुछ ही समय बाद गुरुग्राम की कई सड़कें पानी में डूब गईं। यातायात की रफ्तार थम गई और कई वाहन पानी के बीच फंस गए। सबसे परेशान करने वाली तस्वीरें स्कूल बसों की रहीं, जिनमें बच्चे घंटों तक घर लौटने का इंतज़ार करते रहे।

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, कई बच्चे तीन से छह घंटे तक बसों में फंसे रहे। इस दौरान माता-पिता स्कूलों और बस ड्राइवरों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे। जलभराव और जाम ने शहर में रोज़मर्रा की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया।

दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, सुभाष चौक, राजीव चौक, आईएफ़एफ़सीओ चौक, नरसिंहपुर और पुराने गुरुग्राम के कई हिस्सों से पानी भरने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। गोल्फ कोर्स रोड, डीएलएफ़ और दूसरे पॉश इलाकों में भी भारी बारिश के दौरान जलभराव देखा गया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने गुरुग्राम को ‘साइबर सिटी’ के बजाय ‘स्ट्रेट ऑफ़ गुरुग्राम’ कहकर तंज़ कसा। कई पोस्ट में आधुनिक दफ़्तरों और महंगे रिहायशी इलाकों के बावजूद हर मानसून में दोहराती जलभराव की समस्या पर सवाल उठाए गए।

बारिश के आंकड़े और प्रशासन की सलाह

गुरुग्राम ज़िला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक़, 24 अगस्त को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच गुरुग्राम तहसील में 75 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बादशाहपुर में 65 मि.मी., वज़ीराबाद में 64 मि.मी., कादीपुर और हर्सरू में 40-40 मि.मी. बारिश हुई। मानेसर में 36 मि.मी. बारिश दर्ज की गई।

दोपहर 1.30 बजे तक गुरुग्राम में करीब 70 मि.मी. बारिश दर्ज हो चुकी थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था।

बारिश के बाद गुरुग्राम प्रशासन ने 25 अगस्त को कॉरपोरेट दफ़्तरों में वर्क फ्रॉम होम और स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं की सलाह दी। गुरुग्राम में सालाना औसत बारिश करीब 500-600 मिलीमीटर बताई जाती है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ज़िला पर्यावरण प्लान में औसत सालाना बारिश 505.4 मि.मी. दर्ज है।

शहर का विस्तार और ड्रेनेज की समस्या

गुरुग्राम देश के बड़े कॉरपोरेट और आईटी केंद्रों में शामिल है। ऊंची इमारतें, बड़े मॉल, महंगे रिहायशी प्रोजेक्ट और आधुनिक दफ़्तर शहर की पहचान बन चुके हैं। हालांकि, शहर का इन्फ़्रास्ट्रक्चर उसके विस्तार की रफ्तार से नहीं बदला।

कई ऐसे रिहायशी इलाके हैं जहां घरों की कीमत करोड़ों रुपये है, लेकिन उनके बाहर की सड़कें कुछ घंटों की बारिश के बाद पानी में डूब जाती हैं। महंगे अपार्टमेंट के बाहर भरे पानी के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।

इस समस्या को तेज़ शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी और जल निकायों में बदलाव, ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी से जोड़कर देखा गया है। उपलब्ध सामग्री में विशेषज्ञों ने इसे केवल एक दिन की भारी बारिश का असर नहीं बताया, बल्कि शहर की योजना और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी समस्या के रूप में समझाया है।

अर्बन प्लानर और काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य पुनीत सेठी के मुताबिक, गुरुग्राम की समस्या मैक्रो लेवल और माइक्रो लेवल, दोनों पर है। उन्होंने शहर के ड्रेनेज सिस्टम को मुख्य समस्या बताया। उनके अनुसार, गुरुग्राम के हर इलाके में उसकी जरूरत के हिसाब से अलग ड्रेनेज सिस्टम होना चाहिए, जो फिलहाल नहीं है।

गुरुग्राम की अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट साधिका तिवारी ने कहा कि ड्रेनेज की समस्या को केवल भारी बारिश से नहीं समझा जा सकता। उनके मुताबिक, गुरुग्राम के विकास और प्लानिंग ने प्राकृतिक ड्रेनेज को प्रभावित किया है। बेतरतीब शहरी विकास और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में बदलाव ने शहर की फ़्लडिंग की समस्या बढ़ाई है।

हर साल दोहराती तस्वीर पर सवाल

जलभराव के बाद शहर की स्थिति पर सार्वजनिक बहस फिर तेज़ हुई। लेखक और कमेंटेटर सुहैल सेठ ने एक्स पर व्यंग्य करते हुए लिखा, "गुरुग्राम के अधिकारियों को निशाना बनाना बेहद नाइंसाफ़ी है. भला किसे उम्मीद थी कि मानसून के दौरान बारिश होगी? मानसून के मौसम में बारिश तो कभी होती ही नहीं. यह तो हाल के दिनों में ही शुरू हुई है. पिछले 4,000 सालों से."

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने शहर के शहरी बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाते हुए लिखा, "शहरी बुनियादी ढांचे की तस्वीर: गुरुग्राम में कथित तौर पर प्रति वर्ग किलोमीटर सबसे ज़्यादा नेटवर्थ वाले लोग रहते हैं, मुंबई के मालाबार हिल्स के अलावा. लेकिन शहर में बारिश के पानी के ड्रेनेज के कोई पुख़्ता इंतज़ाम नहीं हैं. बारिश का एक और दिन और वही पुरानी कहानी- जगह-जगह जलभराव. लोग सोशल मीडिया पर नाराज़गी ज़ाहिर करेंगे, लेकिन ज़मीन पर बहुत कुछ बदलता हुआ नहीं दिखता."

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी व्यंग्य करते हुए लिखा, "गुरुग्राम रातों-रात वेनिस बन गया. अब यहां नाव की सवारी का एक शानदार अनुभव भी होना चाहिए! हर साल वही लापरवाही और उदासीनता!"

24 अगस्त की बारिश ने गुरुग्राम के आधुनिक शहरी स्वरूप और उसकी बुनियादी जल निकासी व्यवस्था के बीच का अंतर फिर सामने ला दिया। स्कूल बसों में बच्चों के लंबे समय तक फंसे रहने से जलभराव का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहा।