फ्लाईदुबई की उड़ान EF 1073 के दौरान हुए घटनाक्रम में भारतीय चालक दल सदस्य कैप्टन स्मित मच्छर की सूझबूझ अभी भी चर्चा का विषय है। इसराइली यात्री के हवाले से बताया गया कि हादसे से पहले उन्होंने कैप्टन के कॉकपिट दरवाजे को खोलते देखा, जिससे अन्य लोग घुड़ते हुए अंदर प्रवेश कर सके और विमान को बचाने में मदद मिली। इसके बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने्ड पर कैप्टन मच्छर की बहादुरी की प्रशंसा की, बताकर कि अगर दरवाजा बंद रहता तो स्थिति और भी कठिन हो सकती थी। यह घटना उन बहादुरी की मिसालों में से एक है जो भारतीय विमानकर्मियों के इतिहास में दर्ज है। इसके ठीक पीछे पुराने समय की एक मशहूर कथा भी है—नीरजा भनोट की। 1986 में पैन अमरicano एयरवेज की फुल-रूट उड़ान 73 मुंबई से कराची और फ्रैंकफुर्ट होते हुए न्यूयॉर्क जा रही थी, जिसे हाईजैक कर लिया गया था। विमान में 360 यात्री और चालक दल के 19 सदस्य थे। नीरजा बच्चतम घटनाक्रम के दौरान पहले पायलटों को स्थिति से अवगत कराती हैं और फिर आपातकालीन मार्ग से पूरी टीम सुरक्षित बाहर निकलने में जुट जाती है। बाद में अंधेरा होते-होते उन्होंने विमान के आपातकालीन दरवाज़े को खोल दिया, ताकि अधिकांश यात्री निकल सकें, किंतु तीन छोटे बच्चे बचे रहे। घटना में 22 लोगों की मौत और 150 घायल हुए थे। हाईजैक के पीछे फलेस्तीनी लड़ाकों का नाम और मुख्य हाईजैक के बारे में जानकारी भी रिपोर्ट में दर्ज है, साथ ही 2001 में आरोपी को अमेरिका के एफबीआई को सौंपे जाने की बात भी है। चालक दल के सदस्यों ने इस घटना के अनुभवों काadda खुलासा किया। 2016 में इस हाईजैक के 30 साल पूरे होने पर चालक दल के 6 सदस्य मीडिया से बोले थे और उन्होंने अपने साथ घटित घटनाक्रम को साझा किया।