एंथ्रोपिक ने एक ऐसे जैविक सिस्टम की पहचान की है, जिसमें Crispr जैसी repeat DNA sequences दिखाई देती हैं। कंपनी इस सिस्टम को ART यानी array-associated reverse transcriptases कह रही है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे gene-editing tool मानने से पहले प्रयोगशाला में इसके काम की पुष्टि जरूरी है।
कंपनी के मुताबिक, करीब 950 Claude एजेंट्स ने एक साथ काम करते हुए यह खोज 21.5 घंटे में की। एजेंट्स ने genomic databases में reverse transcriptases के नए उदाहरण तलाशे। ये ऐसे proteins हैं, जो RNA की मदद से DNA की कॉपी बनाते हैं। यह प्रक्रिया हमारी कोशिकाओं में होने वाले सामान्य DNA से RNA प्रवाह के उलट है।
ART सिस्टम क्या है
Claude एजेंट्स ने शुरुआत में 200,000 से ज्यादा संभावित reverse transcriptases पहचाने। इनमें से नए लगने वाले कई हजार विकल्पों को छांटने के बाद खोज एक ऐसे परिवार तक पहुंची, जिसमें लंबे repeat DNA regions थे। ये regions Crispr जैसी संरचना से मिलते-जुलते हैं।
ART jumbo phages में पाया गया है। ये बड़े viruses होते हैं, जो bacteria को infect करते हैं। Anthropic ने कहा है कि उसे अभी इस सिस्टम का काम पूरी तरह समझ नहीं आया है। कंपनी के अनुसार, बहुत कम ज्ञात systems में इसके जैसे features हैं और वे DNA को cut, copy और paste कर सकते हैं।
लेकिन यह साफ नहीं है कि ART ऐसा कर सकता है या नहीं। यह भी पता नहीं है कि अगर इसमें gene-editing क्षमता हुई, तो वह व्यावहारिक रूप से कितनी उपयोगी होगी। इस खोज पर आधारित एक physical experiment technical report में शामिल है, मगर वह report peer-reviewed नहीं है।
वैज्ञानिकों की मुख्य आपत्ति
Stanford University के Le Cong ने कहा कि प्रयोग अभी बाकी हैं, जबकि public relations पहले शुरू हो चुका है। उनके अनुसार, Claude ने ऐसा पदार्थ खोजा है जो देखने में चमकदार लगता है। अब lab में जांचना होगा कि वह वास्तव में diamond है या केवल glass।
Crispr और retrons दोनों bacteria के immune systems हैं, लेकिन दोनों एक जैसे नहीं हैं। Retrons के कुछ gene-editing उपयोग हो सकते हैं, जबकि Crispr एक बहु-उपयोगी system के रूप में जाना जाता है। इसी वजह से ART की Crispr से तुलना को लेकर वैज्ञानिक सावधानी बरत रहे हैं।
Gladstone Institutes के Seth Shipman के मुताबिक, इस खोज की सबसे नई बात संभवतः यह है कि इसे ढूंढने का तरीका AI आधारित था। उनके अनुसार, ART को नया Crispr system कहना सही नहीं होगा, हालांकि खोज फिर भी दिलचस्प है। Shipman की lab ने retrons का इस्तेमाल gene-editing systems बनाने में किया है।
पहले की research से इसका संबंध
Texas A&M University के microbiologist Jason Gill और उनके सहयोगियों ने इसी reverse transcriptase की पहचान 2021 के एक paper में की थी। वह research jumbo phages पर आधारित थी। इसलिए ART के मामले में संभावित नई बात enzyme खुद नहीं, बल्कि उसके आसपास मौजूद repeats से जुड़ा संकेत हो सकता है।
Gill के अनुसार, AI models patterns खोजने में लोगों से बेहतर हो सकते हैं, खासकर तब जब किसी व्यक्ति को बड़े data में लंबे समय तक manually देखना पड़े। फिर भी उन्होंने कहा कि ART का किसी ज्ञात Crispr system से स्पष्ट संबंध नहीं दिखता। अब Anthropic को साबित करना होगा कि इसमें वास्तव में gene-editing activity है।
Reverse transcriptases की ऐसी पहचान में manually genome databases खंगालने पर महीनों लग सकते हैं। Shipman ने कहा कि Claude ने यह काम एक दिन में किया, जो प्रभावशाली है। लेकिन उन्होंने इस उपलब्धि को केवल AI model की autonomous discovery बताने से सावधान किया। इस काम में वैज्ञानिकों ने research problem चुनी, data की जांच की और आगे के प्रयोगों की जरूरत तय की।
AI scientist की सीमाएं
Cong के अनुसार, Anthropic के वैज्ञानिकों ने Claude के लिए ऐसा problem चुना, जिसमें pattern पहचानने की क्षमता खास तौर पर उपयोगी थी। इससे संकेत मिलता है कि AI बड़े biological datasets में इसी तरह के कामों में मदद कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Claude life sciences में हर तरह की खोज को अचानक तेज कर देगा।
मॉडल को किन-किन sources पर train किया गया, इसकी पूरी जानकारी scientific community जांच नहीं सकती। इससे reproducibility को लेकर सवाल उठते हैं। एक researcher ने संदेह जताया कि model को उनके unpublished findings से training मिली हो सकती है, क्योंकि उन्होंने वे results Claude के public version के साथ साझा किए थे। Anthropic ने कहा कि Claude को user transcripts पर train नहीं किया गया और उसकी molecular biology team को ऐसे transcripts की access नहीं है।
Anthropic के CEO Dario Amodei ने कहा है कि भविष्य में Claude खुद lab equipment को autonomously control करके experiments कर सकता है। यह संभावना अभी दूर की बात है। इससे safety और oversight से जुड़े सवाल भी उठते हैं। Amodei ने यह भी कहा कि Anthropic की labs सबसे कम biosafety levels पर हैं और उनमें इंसानों के लिए बहुत हानिकारक चीजें मौजूद नहीं हैं।
Crispr से medicine तक लंबा रास्ता
Bacteria में Crispr sequences की शुरुआती पहचान 1987 में हुई थी। इसके 25 साल बाद, 2012 में Jennifer Doudna और Emmanuelle Charpentier ने दिखाया कि Crispr को DNA काटने वाले programmable tool के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
आज Crispr का इस्तेमाल labs में व्यापक है और cardiovascular conditions, cancers, autoimmune diseases तथा rare disorders के इलाज के लिए दर्जनों clinical trials चल रहे हैं। फिर भी इस technology का इस्तेमाल करने वाली market में केवल एक drug है, जिसे late 2023 में मंजूरी मिली थी। यह उदाहरण दिखाता है कि promising basic science को medicine में बदलने में कितना लंबा समय लग सकता है।
ART के मामले में भी अगला कदम laboratory testing है। जब तक वैज्ञानिक यह नहीं दिखाते कि सिस्टम DNA पर क्या असर डालता है, तब तक इसे gene-editing breakthrough कहना जल्दबाजी होगी।
निष्कर्ष
Anthropic की खोज AI की pattern-finding क्षमता का दिलचस्प उदाहरण है, लेकिन ART की असली biological और gene-editing क्षमता अभी खुली हुई है। इसका महत्व आगे होने वाले laboratory experiments और स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच से तय होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. Anthropic ने क्या खोजा है?
Anthropic ने ART नाम का एक reverse transcriptase family system पहचाना है, जिसमें Crispr जैसी repeat DNA sequences हैं।
Q. ART क्या gene-editing tool है?
अभी यह साबित नहीं हुआ है। इसके लिए laboratory experiments में इसकी gene-editing activity की जांच करनी होगी।
Q. Claude ने ART कैसे खोजा?
Claude एजेंट्स ने बड़े genomic databases में reverse transcriptases के संभावित नए उदाहरण खोजे और फिर उन्हें कई चरणों में छांटा।
Q. क्या ART पूरी तरह नई खोज है?
संबंधित reverse transcriptase को Jason Gill और उनके सहयोगियों ने 2021 के paper में पहले पहचान लिया था। संभावित नई बात उसके आसपास मौजूद repeats का संकेत है।
Q. ART और Crispr में क्या संबंध है?
ART में Crispr जैसी repeat sequences दिखाई देती हैं, लेकिन इसका किसी ज्ञात Crispr system से स्पष्ट संबंध अभी नहीं मिला है।
Q. वैज्ञानिक ART को लेकर सावधान क्यों हैं?
क्योंकि एक technical report में physical experiment शामिल है, लेकिन report peer-reviewed नहीं है और सिस्टम का biological काम अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है।
Q. क्या AI अपने आप scientific discovery कर सकता है?
इस मामले में AI ने बड़े data में patterns खोजने में मदद की, लेकिन scientists ने problem चुनी, results की जांच की और आगे के प्रयोग जरूरी हैं।
Q. Crispr को medicine में आने में कितना समय लगा?
1987 में शुरुआती sequences की पहचान से 2012 में programmable DNA tool के demonstration तक 25 साल लगे।
Q. ART पर अब क्या होगा?
Laboratory experiments से यह जांचा जाएगा कि ART DNA को बदल सकता है या नहीं और उसका gene-editing उपयोग कितना व्यावहारिक है।











