जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के गजूठे गांव में 78 वर्षीय अब्दुल लतीफ शेख अपने बेटे कासिम अली के साथ जंगली मधुमक्खी पालन की पारंपरिक practice को जारी रखे हुए हैं। पिता-पुत्र जंगली मधुमक्खियों की देखभाल करते हैं, प्राकृतिक शहद निकालते हैं और उसे बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

परंपरा और रोज़गार

अब्दुल लतीफ शेख और कासिम अली का काम जंगली मधुमक्खियों की देखभाल, शहद निकालने और उसकी बिक्री से जुड़ा है। यह गतिविधि उनके लिए पारंपरिक हुनर के साथ आमदनी का साधन भी है।

निष्कर्ष

गजूठे गांव में पिता-पुत्र की यह साझेदारी जंगली मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक शहद से जुड़ी स्थानीय आजीविका को सामने लाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. अब्दुल लतीफ शेख कौन हैं?

अब्दुल लतीफ शेख डोडा के गजूठे गांव में जंगली मधुमक्खी पालन करने वाले 78 वर्षीय व्यक्ति हैं।

Q. कासिम अली क्या काम करते हैं?

कासिम अली अपने पिता के साथ जंगली मधुमक्खियों की देखभाल और प्राकृतिक शहद निकालने का काम करते हैं।

Q. यह गांव कहां है?

गजूठे गांव जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में है।

Q. पिता-पुत्र शहद का क्या करते हैं?

वे प्राकृतिक शहद निकालकर उसे बेचते हैं।

Q. इस काम से उन्हें क्या मिलता है?

जंगली मधुमक्खी पालन और शहद की बिक्री उनके लिए आजीविका का साधन है।