अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नया अभियान शुरू किया है। इसके तहत करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाज़ों को प्रतिबंध सूची में जोड़ा गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस अभियान को अभूतपूर्व बताया और कहा कि इसका उद्देश्य विदेशों में ईरान के आर्थिक रास्ते बंद करना है।
इस कार्रवाई का असर ईरान तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। अमेरिका ने उन विदेशी बैंकों, कंपनियों और बिचौलियों पर भी दबाव बढ़ाने की बात कही है, जो ईरान के साथ कारोबार कर रहे हैं। कुछ ऐसी गतिविधियों के लिए समयसीमा तय की जा सकती है, जिन्हें अमेरिका ईरान के व्यापार और आमदनी में मददगार मानता है।
भारत के लिए चिंता का मुख्य कारण ईरान को होने वाला निर्यात है। रॉयटर्स के मुताबिक, भारतीय निर्यातकों ने आशंका जताई है कि नई पाबंदियों से ईरान को चावल, चाय और दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हाल के वर्षों में इन वस्तुओं का बड़ा हिस्सा दुबई के बंदरगाह के रास्ते ईरान पहुंचता रहा है।
पांच नए क्षेत्र प्रतिबंधों के दायरे में
अमेरिका इस अभियान को “ऑपरेशन इकोनॉमिक आइसोलेशन” कह रहा है। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, ईरान के साथ किसी भी तरह का व्यापार करने वाले देशों को अलग-थलग करने का दबाव बनाया जाएगा। नए कदम में डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग को उन क्षेत्रों की सूची में शामिल किया गया है, जहां ईरान से जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई हो सकती है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के फॉरेन एसेट कंट्रोल ऑफिस (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) ने इन क्षेत्रों को ईरानी अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रतिबंध योग्य क्षेत्रों में जोड़ा है। यह कदम 2023 के कार्यकारी आदेश के तहत उठाया गया है। यह आदेश डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान जनवरी 2020 में जारी किया था।
शुरुआत में आदेश के तहत ईरान के निर्माण, खनन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल क्षेत्रों को शामिल किया गया था। वित्त मंत्रालय को बाद में अन्य क्षेत्रों को सूची में जोड़ने की अनुमति थी। उसी वर्ष वित्तीय क्षेत्र भी दायरे में आया। 2024 में तेल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र जोड़े गए।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि नए क्षेत्रों को जोड़ने से सेकेंडरी प्रतिबंधों की संभावित पहुंच बढ़ गई है। विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय इन क्षेत्रों में ईरानी अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों पर किसी भी देश में रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ प्रतिबंध लगा सकता है। इससे ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी संस्थाओं पर भी अमेरिकी कार्रवाई का खतरा बढ़ता है।
अमेरिका ने किन गतिविधियों को निशाने पर लिया
अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान धन भेजने और प्रतिबंधों से बचने के लिए डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल करता है। उसके मुताबिक, ईरान हथियार कार्यक्रमों के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी हासिल करने की कोशिश करता है। रियाल की कीमत गिरने के बीच सोने का इस्तेमाल संपत्ति बचाने के लिए किया जाता है। विमानन और शिपिंग नेटवर्क से उपकरण, धन और तेल के निर्यात में मदद ली जाती है।
प्रतिबंध सूची में शामिल कुछ लोगों और संस्थाओं पर ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के लिए उपकरण उपलब्ध कराने का आरोप है। कुछ को साइबर ऑपरेशन से जोड़ा गया है। अन्य पर तेल निर्यात और उससे हुई कमाई को स्थानांतरित करने में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। ये लोग और संस्थाएं अलग-अलग देशों से संबंधित हैं और उन पर कार्रवाई के आधार भी अलग-अलग हैं।
नए पैकेज में उन गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है, जो पहले ओएफएसी के जनरल लाइसेंस के तहत कुछ शर्तों के साथ जारी रह सकती थीं। इनमें ईरानी छात्रों का दूसरे देशों में अध्ययन, अमेरिकी और ईरानी विश्वविद्यालयों के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज तथा अमेरिका में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति जैसी गतिविधियां शामिल थीं।
कुछ एडमिशन और ट्यूशन सेवाओं, ऑनलाइन कोर्स, गैर-व्यावसायिक शैक्षणिक और शोध गतिविधियों तथा अकादमिक और पेशेवर परीक्षाओं को भी पहले सीमित अनुमति मिली हुई थी। लाइसेंस निलंबित होने के बाद इन गतिविधियों को उसका लाभ नहीं मिलेगा। अमेरिका ने कहा है कि अब संबंधित गतिविधियों के लिए अलग आवेदन करना होगा।
खेल क्षेत्र में 2013 से लागू एक लाइसेंस को भी अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किया गया है। इसके तहत ईरान और अमेरिका के बीच पेशेवर तथा शौकिया खेल आयोजनों और एक्सचेंज कार्यक्रमों की अनुमति थी। टूर्नामेंट, प्रदर्शनी मुकाबले, खिलाड़ियों की प्रायोजन व्यवस्था, कोचिंग, रेफरी की भूमिका और खेल शिक्षा इससे जुड़े हिस्से थे।
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में
नया अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बेहद नाजुक दौर में बताया गया है। ईरान की अर्थव्यवस्था को कई महीनों के सैन्य संघर्ष से भारी नुकसान हुआ है। तेल निर्यात और विदेशी व्यापार में रुकावट आई है। महंगाई बढ़ी है और राष्ट्रीय मुद्रा की कीमत गिरी है।
स्कॉट बेसेंट ने अपने भाषण में इस आर्थिक अभियान को ईरान पर सैन्य दबाव का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सशस्त्र बलों ने “नींव तैयार कर दी है।” इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को अपनी व्यापक ईरान नीति के साथ जोड़कर देख रहा है।
भारत-ईरान व्यापार पर संभावित असर
रॉयटर्स के मुताबिक, भारत ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 में 17 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर से 90 फ़ीसदी से अधिक गिर चुका है। मौजूदा दौर में भारत से ईरान को मुख्य रूप से वे सामान निर्यात किए जाते हैं, जिन्हें मानवीय आधार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है।
नई पाबंदियों में विदेशी कारोबारियों और उन नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की बात कही गई है, जो ईरान के साथ लेन-देन जारी रखते हैं। ऐसे में भारतीय निर्यातकों की चिंता चावल, चाय और दवाओं तक सीमित आपूर्ति व्यवस्था को लेकर है। इन वस्तुओं का व्यापार दुबई के रास्ते होने के कारण क्षेत्रीय वित्तीय और शिपिंग नेटवर्क पर अमेरिकी कार्रवाई का असर महत्वपूर्ण हो सकता है।














