20 जुलाई को दिल्ली में CJP के संसद मार्च के दौरान साहिल लोहचब पैलेट गन से घायल हुए। साहिल के मुताबिक, उनके हाथ में भारत का झंडा था, तभी पैलेट गन चली और वह सुन्न हो गए। उनकी आंखों में अब भी 2 पैलेट हैं। 2 सर्जरी के बाद भी वह देख नहीं पा रहे हैं।

डॉक्टरों ने उन्हें 1 महीने का समय दिया है, लेकिन साहिल ने बताया कि आंखों की रोशनी लौटने की संभावना बहुत कम बताई गई है। उनके दाहिने हाथ की नसें भी अब तक दबी हुई हैं। घायल होने के बाद उन्हें 4 से 5 दिनों तक होश नहीं आया था।

साहिल दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। पढ़ाई के साथ वह परिवार का खर्च संभालने के लिए पार्ट टाइम ड्राइवर का काम भी करते थे। परिवार में 3 भाई हैं और उनके पिता दीपक दिव्यांग हैं। साहिल का कहना है कि चोट के बाद घर चलाने में मुश्किल हो रही है।

प्रदर्शन से अस्पताल तक का घटनाक्रम

साहिल ने बताया कि वह नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज शुरू होने के बाद वह भीड़ के साथ कनॉट प्लेस सर्कल पहुंचे। वहां आंसू गैस छोड़ी गई और इसके बाद उनके ऊपर पैलेट गन चली।

हालत बिगड़ने पर उन्हें लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया। वहां 6 से 7 घंटे रखने के बाद सफदरजंग अस्पताल भेजा गया। बाद में उन्हें एम्स के आई-सेंटर और फिर ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया।

साहिल ने कहा कि उनकी आंख की 2 बार सर्जरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक नजर नहीं लौटी। आंख में 2 पैलेट अब भी मौजूद हैं।

FIR के लिए कई जगह शिकायत

साहिल की मां ज्योति और उनके वकील 14 अगस्त को थाने पहुंचे थे। उनके अनुसार, उस समय FIR दर्ज नहीं की गई। परिवार ने डाक से शिकायत भेजी और दिल्ली पुलिस को ईमेल भी किया, लेकिन FIR की रिसीविंग नहीं मिली।

साहिल ने बताया कि परिवार 2 से 3 बार थाने गया। कोई सीनियर अधिकारी उनसे बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ। परिवार क्राइम ब्रांच भी गया, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला।

21 अगस्त को राहुल गांधी करीब 6 घंटे संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे। इसके बाद साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। साहिल के अनुसार, राहुल गांधी की टीम ने करीब 5 दिन बाद उनकी मां से संपर्क किया और स्वास्थ्य की जानकारी मांगी थी। परिवार ने FIR दर्ज न होने की बात बताई। इसके बाद राहुल गांधी ने उन्हें बुलाया।

21 अगस्त की सुबह साहिल और उनका परिवार राहुल गांधी से मिला। इसके बाद वे उनके साथ पहले कनॉट प्लेस थाने गए। साहिल ने इस मुलाकात को अपने लिए भाग्यशाली बताया।

मां को अस्पताल से मिली जानकारी

ज्योति ने बताया कि साहिल 20 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे घर से निकले थे। दोपहर 3 बजे तक जब उन्होंने फोन नहीं उठाया, तो परिवार घबरा गया। इसके बाद लेडी हार्डिंग अस्पताल से फोन आया कि साहिल को चोट लगी है। परिवार वहां पहुंचा।

ज्योति ने कहा कि परिवार को पहले लगा था कि शायद साहिल के हाथ में चोट लगी होगी। पैलेट गन से घायल होने की जानकारी अस्पताल पहुंचने के बाद मिली।

प्रदर्शन में घायल हुए दूसरे लोग

प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अन्य लोगों के बारे में उपलब्ध जानकारी इस प्रकार है:

  • शेख इरशाद मंसूरी, 25 साल: उनके चेहरे और गर्दन में पैलेट लगे थे। लेडी हार्डिंग अस्पताल में सर्जरी कर पैलेट निकाले गए और 24 जुलाई को छुट्टी दी गई।
  • प्रशांत कुमार सिंह, 25 साल: उनके दाहिने हाथ, सीने और जांघ के पास चोट लगी। बाद की एक्स-रे जांच में शरीर में कम से कम 10 कण रह जाने की बात सामने आई।
  • नूतन टोप्पो: उनके दाहिने कान में गंभीर चोट लगी और कान का एक हिस्सा लगभग कट गया। आरएमएल अस्पताल में सर्जरी के बाद कान की मरम्मत की गई। बाद में वह अपने शहर लौट गईं।
  • साक्षी, 21 साल: वह गंभीर चोटों के बाद आरएमएल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हुईं। करीब 1 हफ्ते तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद 22 जुलाई को उन्हें हटाया गया। 30 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी मिली। उनका मामला पैलेट चोट का नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान लगी गंभीर चोटों का था।

भीड़ नियंत्रण में बल प्रयोग के नियम

भारत में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों में BNSS की धारा 148(1) और 148(2) का उल्लेख है।

BNSS की धारा 148(1) के तहत, 5 या उससे ज्यादा लोगों की भीड़ से सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा हो, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट या अधिकृत पुलिस अधिकारी उसे हटने का आदेश दे सकता है। आदेश के बाद भीड़ न हटे, तो धारा 148(2) के तहत उसे हटाने के लिए बल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के मुताबिक, बल की मात्रा भीड़ के आकार के अनुसार जरूरी सीमा तक रखी जानी चाहिए। भीड़ के बिखरते ही लाठीचार्ज रोकना चाहिए और सिर पर वार नहीं किया जाना चाहिए।

स्थिति के अनुसार आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए हवा की दिशा और गति जैसे मौसम संबंधी हालात को ध्यान में रखना जरूरी है।