नेपाल में फ्लैश बाढ़ से मौतों का आंकड़ा रविवार को 788 पहुंच गया। 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल आपदा के पांचवें दिन भी प्रभावित इलाकों में तलाशी और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।

8 प्रभावित जिलों से शव बरामद किए गए हैं। रेस्क्यू टीमें लापता लोगों की तलाश के साथ उन लोगों को निकालने में जुटी हैं, जो बाढ़ और मलबे के बीच फंसे हुए हैं।

कैसे आई तबाही

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर आया। इसके साथ पानी, कीचड़ और मलबे की तेज धारा बनी, जिसने रास्ते में मौजूद बस्तियों को प्रभावित किया।

यह धारा उत्तरी और मध्य नेपाल से होकर आगे बढ़ी। इससे कस्बों और गांवों को भारी नुकसान पहुंचा। कई जरूरी बुनियादी ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए।

जलविद्युत केंद्र भी प्रभावित

बाढ़ की तेज धारा में जलविद्युत केंद्र बह गए। इससे आपदा का असर केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रहा और महत्वपूर्ण ढांचा भी इसकी चपेट में आया।

बचावकर्मी मलबे और बाढ़ के बीच लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लापता लोगों की बड़ी संख्या के कारण तलाशी अभियान जारी है और नए शव मिलने से मृतकों का आंकड़ा बढ़ा है।

निष्कर्ष

नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई फ्लैश बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। बचाव दल अब भी लापता लोगों और फंसे हुए लोगों की तलाश में जुटे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. नेपाल फ्लैश बाढ़ में कितनी मौतें हुई हैं?

मौतों का आंकड़ा 788 पहुंच गया है।

Q. नेपाल बाढ़ में कितने लोग लापता हैं?

2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।

Q. बचाव अभियान कितने जिलों में चल रहा है?

शव 8 प्रभावित जिलों से बरामद किए गए हैं और वहां तलाशी अभियान जारी है।

Q. नेपाल में फ्लैश बाढ़ की वजह क्या थी?

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद पानी, कीचड़ और मलबे की तेज धारा नीचे आई।

Q. बाढ़ से किन इलाकों को नुकसान हुआ?

उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों के साथ जरूरी बुनियादी ढांचे और जलविद्युत केंद्र प्रभावित हुए हैं।