मिट्टी का pH बिगड़ने पर फसल को पोषक तत्व सही मात्रा में नहीं मिल पाते। अम्लीयता या क्षारीयता यह तय करती है कि पोषण पौधों की जड़ों तक पहुंचेगा या नहीं। प्राकृतिक खेती से जुड़ी सामग्री में pH के स्तर के अनुसार मिट्टी सुधारने के उपाय बताए गए हैं।
pH के अनुसार मिट्टी का उपचार
बहुत अम्लीय मिट्टी का pH 5.5 से कम होता है। ऐसी स्थिति में फॉस्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम मिट्टी में बंध जाते हैं। इसमें चूना डालने, मिट्टी परीक्षण के आधार पर मात्रा तय करने और साल में 1 बार पर्याप्त मात्रा देने की सलाह दी गई है। इससे pH में 12 से 17 प्रतिशत तक सुधार बताया गया है।
मध्यम अम्लीय मिट्टी का pH 5.5 से 6.5 के बीच होता है। इसमें गोबर की खाद या पुआल पर्याप्त मात्रा में डालने और हर मौसम में जैविक पदार्थ बढ़ाने की बात कही गई है। इससे pH अपने आप संभलने के साथ कैटायन एक्सचेंज क्षमता भी बेहतर होने की जानकारी दी गई है।
क्षारीय मिट्टी का pH 7.5 या उससे अधिक होता है। ऐसी मिट्टी में लोहे, जिंक और मैंगनीज की उपलब्धता कम हो जाती है। इसके लिए जिप्सम, अच्छी तरह पकी गोबर की खाद, नियमित जीवामृत छिड़काव और हरी खाद, जैसे ढैंचा या सनई, मिट्टी में मिलाने के उपाय बताए गए हैं।
pH 6.5 से 7.5 वाली तटस्थ मिट्टी को सबसे उपयुक्त बताया गया है। इसमें गोबर की खाद और पलवार का इस्तेमाल जारी रखने की सलाह है। इस स्थिति में किसी विशेष उपचार की जरूरत नहीं बताई गई है।
मिट्टी जांच और प्राकृतिक उपाय
हर 3 साल में 1 बार मिट्टी परीक्षण कराने की सलाह दी गई है। इसके लिए मुफ्त सरकारी सुविधा उपलब्ध होने की बात कही गई है। सटीक सिफारिश के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ने को कहा गया है।
सामग्री में कच्ची गोबर खाद के बजाय पूरी तरह पकी गोबर खाद इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। पलवार लगातार बिछाने से जैविक पदार्थ बढ़ने और pH के अपने आप संभलने की बात कही गई है।
pH बिगड़ने के संकेत
मिट्टी का pH असंतुलित होने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- पत्तियां पीली हों, लेकिन नसें हरी रहें, तो लोहे की कमी और अधिक pH का संकेत हो सकता है।
- फल आने के बावजूद फल न बनें, तो फॉस्फोरस की कमी और बहुत कम pH की स्थिति हो सकती है।
- जड़ें छोटी और कमजोर रहें, तो मिट्टी बहुत अम्लीय हो सकती है।
- खरपतवार भी न उगे, तो मिट्टी के बहुत क्षारीय होने का संकेत माना गया है।
प्राकृतिक तरीकों को सस्ता, स्थायी और मिट्टी को नुकसान न पहुंचाने वाला बताया गया है।










