सोने और चांदी की कीमतों में 10 दिन की गिरावट के बाद 3 सितंबर को तेज उछाल आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय कमोडिटी मार्केट तक दोनों धातुओं में खरीदारी बढ़ी। यह तेजी शाम के कारोबार में खास तौर पर दिखाई दी।
ग्लोबल मार्केट में बड़ा उछाल
ग्लोबल मार्केट में सोना 2.84% बढ़कर 4,540 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इसकी कीमत में 125 डॉलर की बढ़त दर्ज हुई। कोमेक्स पर चांदी 2.71% यानी 1.77 डॉलर चढ़ी और 67 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई।
भारतीय बाजार में भी सोना और चांदी मजबूत हुए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना ₹3,400 प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ। चांदी की कीमत में ₹4,400 प्रति किलोग्राम का उछाल आया।
एमसीएक्स पर सोने-चांदी के भाव
शाम 7 बजे तक एमसीएक्स पर सोना ₹1,55,401 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। सत्र के दौरान इसका उच्च स्तर ₹1,55,798 और निचला स्तर ₹1,53,251 रहा। इससे पिछले कारोबारी दिन सोना ₹1,52,402 पर बंद हुआ था।
चांदी ₹2,39,888 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी। पिछले कारोबारी सत्र में यह ₹2,36,266 पर बंद हुई थी। चांदी के उच्च और निचले स्तर से जुड़े आंकड़ों में रिपोर्टिंग असंगति है, इसलिए इन दोनों स्तरों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
तेजी के पीछे क्या वजह बताई गई
इस उछाल की प्रमुख वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का मिडिल ईस्ट में लंबे सैन्य अभियान से इनकार करने वाला बयान बताया गया। ट्रंप ने कहा कि ईरान पर हालिया अमेरिकी हमले अल्पकालिक रहने की संभावना है।
इस बयान के बाद तेल की हालिया तेजी धीमी पड़ने और महंगाई की चिंताओं में कमी आने की बात कही गई। महंगाई का दबाव कम होने से सोने पर बना दबाव भी हल्का हुआ।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई फिर तेज हो सकती है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी सेंट्रल बैंक, यानी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve), ब्याज दरों में कटौती से बच सकता है।
ब्याज दर और रोजगार के संकेत
ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए चुनौती मानी जाती हैं, क्योंकि इस धातु से निवेशकों को तय ब्याज नहीं मिलता। न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स ने कहा कि टैरिफ का असर घटने के साथ अमेरिकी महंगाई में नरमी जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर अन्य सेवाओं तक नहीं फैल रहा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सुस्त आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के नरम संकेतों से सोने को समर्थन मिला। हालिया एडीपी रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में अमेरिकी कंपनियों ने 38,000 नई नौकरियां जोड़ीं। रोजगार की यह सुस्ती फेड की ओर से ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम करती है।
इससे पहले जैक्सन होल मीटिंग में फेड चेयर केविन वॉर्श ने सख्त रुख अपनाया था। इससे दरें बढ़ने की आशंका बनी थी। बाद में ट्रंप के संघर्ष जल्द खत्म होने के संकेत और फेड अधिकारियों के महंगाई नरम पड़ने वाले बयान बाजार के लिए राहत वाले रहे।
इसी माहौल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,500 डॉलर के आसपास मजबूत बना हुआ है। कीमतों की आगे की दिशा तेल की सप्लाई, अमेरिकी महंगाई, रोजगार आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों से प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष
3 सितंबर की तेजी ने 10 दिन की गिरावट का रुख बदला। सोने-चांदी के अगले कदम के लिए बाजार अब अमेरिकी महंगाई, रोजगार और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर ध्यान देगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. 3 सितंबर को एमसीएक्स पर सोने का भाव क्या था?
शाम 7 बजे तक सोना ₹1,55,401 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
Q. एमसीएक्स पर चांदी का भाव कितना रहा?
चांदी ₹2,39,888 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी।
Q. ग्लोबल मार्केट में सोना कितने प्रतिशत चढ़ा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.84% बढ़ा और 4,540 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
Q. चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमत में कितना उछाल आया?
कोमेक्स पर चांदी 2.71% यानी 1.77 डॉलर बढ़कर 67 डॉलर प्रति औंस के पार गई।
Q. सोने-चांदी में तेजी की प्रमुख वजह क्या बताई गई?
तेजी की प्रमुख वजह डोनल्ड ट्रंप का मिडिल ईस्ट में लंबे सैन्य अभियान से इनकार करने वाला बयान बताया गया।
Q. अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों का सोने पर क्या असर पड़ा?
अगस्त में अमेरिकी कंपनियों ने 38,000 नई नौकरियां जोड़ीं। रोजगार की सुस्ती से ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हुईं और सोने को समर्थन मिला।














