सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित नई लाइब्रेरी की व्यवस्था पर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल मौजूदा किताबों को रखने के लिए उपलब्ध जगह और नई सुविधा की योजना को लेकर रहा।
कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि दिल्ली के आरके पुरम में करीब 2 लाख किताबें कार्टन में रखी हैं। ये किताबें वर्ष 2011 से खोली नहीं गई हैं।
अदालत ने मौजूदा लाइब्रेरी के संग्रह और नई इमारत में किताबों के लिए प्रस्तावित जगह के बारे में स्पष्ट जानकारी मांगी। इस दौरान यह भी पूछा गया कि नई सुविधा में अन्य व्यवस्थाओं के साथ किताबों के लिए पर्याप्त स्थान बचेगा या नहीं।
नई इमारत की योजना पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि प्रस्तावित ढांचे में कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरी सुविधाओं के बाद लाइब्रेरी तथा किताबों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी या नहीं।
इस सवाल का केंद्र बिंदु केवल नई इमारत का निर्माण नहीं, बल्कि मौजूदा पुस्तक संग्रह को उसमें समायोजित करने की व्यवस्था है। अदालत ने इसी संबंध में वर्तमान संग्रह और प्रस्तावित स्थान का विवरण जानना चाहा।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट की चिंता प्रस्तावित सेंट्रल विस्टा लाइब्रेरी में मौजूदा किताबों के लिए पर्याप्त जगह और उनकी व्यवस्था से जुड़ी है। अदालत ने केंद्र से लाइब्रेरी संग्रह तथा नई सुविधा में उपलब्ध कराई जाने वाली जगह पर स्पष्टता मांगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. सुप्रीम कोर्ट ने किस मुद्दे पर चिंता जताई?
कोर्ट ने प्रस्तावित नई लाइब्रेरी में मौजूदा किताबों को रखने के लिए उपलब्ध जगह पर चिंता जताई।
Q. किताबें अभी कहां रखी हैं?
करीब 2 लाख किताबें दिल्ली के आरके पुरम में कार्टन में रखी हैं।
Q. ये किताबें कब से बंद हैं?
किताबें वर्ष 2011 से खोली नहीं गई हैं।
Q. कोर्ट ने केंद्र से क्या जानकारी मांगी?
कोर्ट ने मौजूदा लाइब्रेरी संग्रह और नई सुविधा में किताबों के लिए प्रस्तावित जगह का विवरण मांगा।
Q. केंद्र की ओर से कौन पेश हुआ?
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं।










