भारत की सांख्यिकी व्यवस्था को ज्यादा तेज, लचीला और प्रतिक्रिया से सीखने वाला बनाने की जरूरत है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) के सचिव सौरभ गर्ग ने मंत्रालयों और राज्यों के बीच डेटा के मुक्त प्रवाह पर जोर दिया। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया के 13वें वार्षिक फोरम में कही।
गर्ग के मुताबिक, डेटा हार्मोनाइजेशन (Data Harmonisation) मंत्रालय की प्राथमिकताओं में रहेगा। इसके लिए अलग-अलग विभागों में इस्तेमाल होने वाली परिभाषाओं को एक जैसा बनाना होगा। डेटा में साझा पहचान संकेतक जोड़ने होंगे और फाइलों को मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में रखना होगा। इससे विभिन्न विभागों के आंकड़ों को मिलाकर ज्यादा उपयोगी निष्कर्ष निकाले जा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि नागरिकों और कारोबारों को सरकार की अलग-अलग शाखाओं के सामने एक ही जानकारी बार-बार जमा नहीं करनी चाहिए। इसके लिए विभागों के डेटाबेस के बीच बेहतर तालमेल और आपसी उपयोग की क्षमता जरूरी होगी।
एआई के इस्तेमाल पर सख्त सीमा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के इस्तेमाल को लेकर गर्ग ने सावधानी की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मोस्पी विश्लेषण से जुड़े कामों में एआई का उपयोग कर रहा है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट सीमाएं जरूरी हैं। एआई से तैयार कोई भी डेटा या निष्कर्ष सत्यापित और मान्य स्रोतों पर आधारित होना चाहिए।
उन्होंने छोटे डोमेन मॉडल्स के लिए स्पष्ट सुरक्षा नियमों की जरूरत बताई, ताकि गलत या गढ़े हुए निष्कर्ष सामने न आएं। घर-घर होने वाले सर्वे में एआई सर्वे कर्मचारियों को व्यवसायों और उद्योगों का वर्गीकरण करने में भी मदद कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, इससे डेटा की गुणवत्ता बेहतर करने में सहायता मिलती है।
गर्ग ने पीएम गति शक्ति और एक Nation, एक Ration Card को ऐसे उदाहरणों के रूप में बताया, जहां अलग-अलग स्रोतों के बीच डेटा की आपसी उपयोगिता से सेवाओं की पहुंच बेहतर हुई। उनके अनुसार, बड़े स्तर पर डिजिटल सेवाएं इस तरह पहुंचनी चाहिए कि वे सभी लोगों के लिए सुलभ रहें।
कागज से टैबलेट तक पहुंचा सर्वे डेटा
उन्होंने बताया कि घरेलू सर्वे अब कागज और पेन तक सीमित नहीं हैं। सर्वे का डेटा टैबलेट के जरिए दर्ज होकर बैकएंड प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम में अपलोड किया जा रहा है। इससे आंकड़े उपलब्ध होने में लगने वाला समय घटता है।
गर्ग ने कहा कि सरकार और नीति निर्माता पुराने आंकड़ों के बजाय ताजा डेटा चाहते हैं। उनका जोर ऐसे सिस्टम पर है, जो सर्वे के नतीजों को जल्दी दर्ज, जांच और इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा सके।
पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े भुगतान डेटा से खर्च के रुझानों की ज्यादा स्पष्ट तस्वीर मिल रही है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों और इलाकों में खर्च बढ़ रहा है और आर्थिक गतिविधियां विस्तार कर रही हैं।
जिला स्तर के आंकड़ों पर जोर
मोस्पी ने हाल के महीनों में जिला स्तर का विश्लेषण जारी करना भी शुरू किया है। गर्ग ने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर फैसले लेने में मदद मिलेगी। केवल राज्य या राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों पर निर्भर रहने से नीति निर्माताओं को सभी इलाकों के लिए एक जैसी तस्वीर दिखाई देती है।
राज्यों के स्तर पर मंत्रालय, स्टेट डायरेक्टोरेट्स ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य श्रम, महंगाई और औद्योगिक वृद्धि से जुड़े आंकड़ों को केंद्रीय प्रोटोकॉल के अनुरूप लाना है।
मोस्पी ने ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर डिस्ट्रिक्ट डोमेस्टिक प्रोडक्ट के अनुमान तैयार करने पर भी काम कर रहा है। गर्ग ने कहा कि इससे राज्यों को ऐसे आंकड़े जारी करने में मदद मिलेगी, जिनकी दूसरे राज्यों के आंकड़ों से तुलना की जा सके।
अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों की समीक्षा
गर्ग ने बताया कि मंत्रालय करीब 28 अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों पर नजर रखता है। संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर इन सूचकांकों के डेटा स्रोतों और उनकी गणना की पद्धति की समीक्षा की जाती है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि इस्तेमाल किए जा रहे तरीके भारत के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि कई देशों से मिले फीडबैक के बाद कुछ अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों में बदलाव भी हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, विश्व बैंक ने Ease of Doing Business रैंकिंग की जगह B-READY Index शुरू किया है।
निष्कर्ष
सौरभ गर्ग का जोर ऐसे डेटा सिस्टम पर है, जिसमें आंकड़े साझा किए जा सकें, जल्दी अपडेट हों और राज्यों व जिलों के बीच तुलना संभव हो। एआई का इस्तेमाल भी सत्यापित स्रोतों और स्पष्ट सुरक्षा सीमाओं के भीतर रखने पर जोर दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. मोस्पी सचिव सौरभ गर्ग ने किस बदलाव की बात कही?
उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था बेहतर बनाने और आंकड़ों को अधिक उपयोगी बनाने की बात कही।
Q. डेटा हार्मोनाइजेशन क्यों जरूरी है?
एक जैसी परिभाषाओं और साझा पहचान संकेतकों से अलग-अलग विभागों के डेटा को जोड़ना आसान होगा।
Q. एआई के इस्तेमाल पर मोस्पी का रुख क्या है?
एआई से बने डेटा और निष्कर्ष सत्यापित व मान्य स्रोतों पर आधारित होने चाहिए। छोटे डोमेन मॉडल्स के लिए सुरक्षा सीमाएं भी जरूरी हैं।
Q. जिला स्तर के विश्लेषण से क्या फायदा होगा?
इससे स्थानीय फैसलों के लिए जिले की स्थिति से जुड़े अधिक उपयोगी आंकड़े मिल सकेंगे।
Q. मोस्पी राज्यों के साथ किस तरह काम कर रहा है?
मंत्रालय श्रम, महंगाई, औद्योगिक वृद्धि और घरेलू उत्पादन से जुड़े आंकड़ों को केंद्रीय प्रक्रियाओं के अनुरूप बनाने पर काम कर रहा है।
Q. मंत्रालय कितने अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों की समीक्षा करता है?
मोस्पी करीब 28 अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों के स्रोतों और पद्धतियों की समीक्षा करता है।













