महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के पुणे स्थित C&F सेंटर का औषधि बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह आदेश वडकी स्थित केंद्र पर लागू हुआ और 27 अगस्त 2026 से प्रभावी है। इसके बाद इस केंद्र से दवाओं की बिक्री और वितरण की अनुमति समाप्त हो गई।
यह कार्रवाई रिएक्टिन प्लस टैबलेट से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। FDA के मुताबिक, निरीक्षण में दवाओं के स्टॉक, रिकॉर्ड और भंडारण व्यवस्था से संबंधित कई खामियां मिलीं। विभाग ने इन कमियों को दवा कारोबार के तय नियमों का उल्लंघन माना।
जांच के दौरान केंद्र में मौजूद वास्तविक दवा स्टॉक और कंप्यूटर रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों में भी कमियां सामने आईं। कुछ दवाएं जमीन पर रखी मिलीं। उनके लिए पर्याप्त रैक और पैलेट की व्यवस्था नहीं थी।
अधिकारियों को एक्सपायर्ड दवाओं से जुड़े रिकॉर्ड में भी कमी मिली। ऐसी दवाओं के अलग प्रबंधन और निपटान के लिए जरूरी प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया गया था। FDA ने स्टॉक संभालने और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को गंभीरता से लिया।
रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर आपत्ति
जांच में रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग भी जांच के दायरे में आई। यह शेड्यूल-H श्रेणी की डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है। FDA के अनुसार, पैकेजिंग पर दर्द कम करने और बुखार घटाने वाली दवा से संबंधित उल्लेख किया गया था। इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी।
विभाग ने इस उल्लेख को दवा से जुड़े नियमों का उल्लंघन माना। मामले में करीब 11.91 लाख रुपये का दवा भंडार जब्त किया गया। FDA ने कहा कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं की बिक्री, भंडारण और वितरण तय कानूनी प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए।
FDA ने रिएक्टिन प्लस के ऐसे स्टॉक को बाजार से वापस लेने का निर्देश भी दिया, जिसकी पैकेजिंग पर गलत जानकारी से जुड़ा सवाल उठा था। कंपनी से बाजार में मौजूद संबंधित दवाएं वापस मंगाने को कहा गया। हालांकि, जांच के दौरान विभाग को निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने की बात मिली।
कारण बताओ नोटिस के बाद लाइसेंस रद्द
निर्देशों के पालन से जुड़े मामले के बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। FDA ने उससे अपना स्पष्टीकरण मांगा। विभाग ने कंपनी के जवाब और जांच में सामने आए तथ्यों की समीक्षा की। इसके बाद पुणे C&F केंद्र का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया।
FDA ने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। दवा स्टॉक और रिकॉर्ड को सही तरीके से रखना जरूरी है। इसके साथ ही भंडारण, रखरखाव और वितरण से जुड़े नियमों का पालन भी अनिवार्य है।
महाराष्ट्र FDA ने शेड्यूल-H जैसी पर्ची वाली दवाओं के मामले में विशेष सावधानी पर जोर दिया। विभाग के अनुसार, ऐसी दवाओं के विज्ञापन, बिक्री, भंडारण और वितरण के लिए तय कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। नियमों की अनदेखी मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सिप्ला ने अदालत में आदेश को चुनौती दी
सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज ने पुणे FDA के आदेश पर अपनी सफाई दी है। कंपनी ने कहा कि उसने आदेश को चुनौती दी है और मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। इसी वजह से उसने इस स्तर पर कार्रवाई पर आगे टिप्पणी करना उचित नहीं बताया।
कंपनी ने यह भी कहा कि आदेश में उसकी दवाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता या असर को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई है। उसके अनुसार, आदेश में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा कोई मामला भी शामिल नहीं है। सिप्ला ने कहा कि वह पिछले 90 सालों से स्वास्थ्य क्षेत्र में भरोसेमंद संस्था रही है। कंपनी ने गुणवत्ता, नियमों के पालन और मरीजों की सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।














