दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले कई ट्रेनों के रद्द होने और आवाजाही पर सख्त पाबंदियों का असर हवाई किराये पर दिखा है। दिल्ली आने-जाने वाली कुछ फ्लाइटों में आखिरी समय की बुकिंग महंगी हुई है, हालांकि यात्रियों के बड़े पैमाने पर ट्रेन या बस छोड़कर विमान चुनने के स्पष्ट संकेत अभी नहीं मिले हैं।
सोमवार से नवरात्र शुरू होने के साथ त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है। इस वजह से सप्ताहांत की उड़ानों में पहले से ही बुकिंग और किराये ऊंचे थे। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक, प्रदर्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियां लंबे समय तक जारी रहीं तो हवाई यात्रा की मांग और बढ़ सकती है।
वाराणसी-दिल्ली उड़ान का किराया 14,000 रुपये तक
एक प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, शुक्रवार रात तक लखनऊ, प्रयागराज और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से दिल्ली आने वाली फ्लाइटों की तत्काल बुकिंग में बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखी थी। वाराणसी से दिल्ली के शनिवार के सफर के लिए तत्काल टिकट का किराया 1 महीने पहले की तुलना में करीब 15 फीसदी अधिक रहा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों की वेबसाइट पर वाराणसी से दिल्ली की एकतरफा फ्लाइट का किराया 6,200 रुपये से शुरू होकर 14,000 रुपये तक पहुंच गया। अधिकारी ने कहा कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि ट्रेन और बस सेवाओं में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने हवाई सफर चुना है।
अमृतसर और लुधियाना रूट पर भी उतार-चढ़ाव
अमृतसर से दिल्ली की कुछ उड़ानों का एकतरफा किराया शुक्रवार को करीब 8,000 रुपये तक पहुंच गया। सामान्य तौर पर इस रूट का किराया लगभग 4,000 रुपये रहता है। इस तरह कुछ टिकटों की कीमत सामान्य स्तर के करीब दोगुनी रही।
लुधियाना से शनिवार की फ्लाइट का किराया दिनभर बदलता रहा। यह एक समय 12,987 रुपये तक पहुंचा, लेकिन रात 8 बजे तक घटकर 4,301 रुपये रह गया। इससे इस रूट पर आखिरी समय की बुकिंग में किराये के उतार-चढ़ाव का पता चलता है।
अमृतसर के ट्रैवल एजेंट दलिप के मुताबिक, आगे की यात्रा की योजना बना चुके यात्रियों के पास सीमित विकल्प हैं। खासकर अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट पकड़ने वाले यात्री आगे की ट्रेन या फ्लाइट रद्द होने और कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने के जोखिम से बचने के लिए महंगे टिकट खरीद रहे हैं।
एयरपोर्ट तक पहुंचना भी चुनौती
एयरलाइंस और दिल्ली एयरपोर्ट के सामने यात्रियों, क्रू सदस्यों और अन्य कर्मचारियों के समय पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पहुंचने की चुनौती भी है। मेट्रो सेवाओं में बड़े स्तर पर व्यवधान की आशंका और सड़क यातायात प्रभावित होने से एयरपोर्ट पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रहने और हवाई यात्रा की मांग बढ़ने पर किराये में और उछाल आ सकता है। उनके अनुसार, जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों और रुपये में गिरावट से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पहले ही बढ़ी हुई है।
शुक्रवार शाम तक चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर फ्लाइट और कैब के किराये में बड़ा बदलाव नहीं देखा गया था। इससे संकेत मिलता है कि किराये में बढ़ोतरी सभी रूटों पर एक जैसी नहीं रही।
निष्कर्ष
CJP प्रदर्शन से पहले ट्रेनों के रद्द होने और आवाजाही से जुड़ी चिंताओं के बीच वाराणसी, अमृतसर और लुधियाना से दिल्ली आने वाली कुछ उड़ानों के किराये में तेज बदलाव दिखा है। हालांकि, अभी बड़े पैमाने पर यात्रियों के हवाई सफर अपनाने की पुष्टि नहीं हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. वाराणसी से दिल्ली की फ्लाइट का किराया कितना पहुंचा?
शनिवार को एकतरफा टिकट का किराया 6,200 रुपये से शुरू होकर 14,000 रुपये तक पहुंच गया।
Q. वाराणसी-दिल्ली किराये में कितनी बढ़ोतरी बताई गई?
शनिवार के तत्काल टिकट का किराया 1 महीने पहले की तुलना में करीब 15 फीसदी अधिक रहा।
Q. अमृतसर से दिल्ली का हवाई किराया कितना रहा?
कुछ उड़ानों का एकतरफा किराया करीब 8,000 रुपये तक पहुंचा, जबकि सामान्य किराया लगभग 4,000 रुपये रहता है।
Q. लुधियाना से दिल्ली की फ्लाइट का किराया कितना बदला?
किराया एक समय 12,987 रुपये तक पहुंचा और रात 8 बजे तक घटकर 4,301 रुपये रह गया।
Q. क्या यात्री बड़ी संख्या में ट्रेन या बस छोड़कर फ्लाइट ले रहे हैं?
ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, अभी इसका कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।
Q. दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने में क्या परेशानी हो सकती है?
मेट्रो सेवाओं में व्यवधान की आशंका और सड़क यातायात प्रभावित होने से यात्रियों, क्रू और कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है।
Q. किन वजहों से हवाई किराया आगे बढ़ सकता है?
प्रदर्शन और आवाजाही की पाबंदियां लंबे समय तक जारी रहने पर मांग बढ़ सकती है। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार, जेट ईंधन की कीमतों और रुपये में गिरावट से परिचालन लागत भी बढ़ी हुई है।






