गोंडा, उत्तर प्रदेश में बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए देश में कोई तय प्रक्रिया नहीं थी।

सिंह ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे 1 मामले का उल्लेख किया। उनके अनुसार, अदालत ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में पूछा था। उन्होंने कहा कि इसके बाद संवैधानिक तरीके से चुनी गई संसद ने इस विषय पर कानून बनाया।

नियुक्ति कानून पर सिंह की बात

सिंह के मुताबिक, कानून के तहत नियुक्ति से जुड़ी समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक व्यक्ति को शामिल किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, लेकिन अब तक इसे रद्द नहीं किया गया।

बीजेपी नेता ने चुनाव आयोग से जुड़े पुराने नियुक्ति मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि नवीन चावला और एमएस गिल की नियुक्तियां किस प्रक्रिया के तहत हुई थीं।

चुनाव प्रक्रिया पर टिप्पणी

सिंह ने कहा कि 2014 के बाद कुछ लोगों को परेशानी होने लगी, क्योंकि उनके प्रभाव का आधार कमजोर पड़ने लगा। उन्होंने ईवीएम से पहले हुए चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ईवीएम और भारत की चुनाव प्रक्रिया सही मानी जाती थी, जबकि अब अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।

उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े पुराने दौर को “हिटलर जैसी तानाशाही” बताया। यह सिंह का आरोप और राजनीतिक बयान है।

निष्कर्ष

बृजभूषण शरण सिंह ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की पुरानी व्यवस्था, मौजूदा कानून और चुनाव प्रक्रिया पर अपनी आपत्तियां रखीं। उन्होंने पुराने नियुक्ति मामलों को भी इसी बहस से जोड़कर सवाल उठाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. बृजभूषण शरण सिंह ने बयान कहां दिया?

उन्होंने गोंडा, उत्तर प्रदेश में यह बयान दिया।

Q. सिंह किस मुद्दे पर बोल रहे थे?

वह चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव व्यवस्था पर बोल रहे थे।

Q. उन्होंने 2023 का जिक्र क्यों किया?

उन्होंने कहा कि 2023 के आसपास चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

Q. नियुक्ति कानून में समिति को लेकर क्या कहा गया?

सिंह के अनुसार, समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक व्यक्ति शामिल होता है।

Q. किन पूर्व नियुक्तियों पर उन्होंने सवाल उठाए?

उन्होंने नवीन चावला और एमएस गिल की नियुक्तियों का जिक्र किया।