एशिया की यूनिवर्सिटीज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर बहस के बीच पाठकों ने मूल्यांकन, संवेदनशील एआई और राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा को लेकर अलग-अलग सुझाव दिए हैं। इन पत्रों में शिक्षा व्यवस्था को केवल नियमों या निगरानी तक सीमित करने के बजाय सीखने की प्रक्रिया, नैतिक जिम्मेदारी और विषय आधारित समझ पर जोर दिया गया है।
अंतिम उत्तर के बजाय सीखने की प्रक्रिया
काठमांडू के Swaansh Mahat ने लिखा कि यूनिवर्सिटीज को एआई डिटेक्टर से शुरुआत नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, असाइनमेंट ऐसा होना चाहिए जिसमें छात्र के काम करने की प्रक्रिया दिखाई दे।
उनका तर्क है कि केवल अंतिम निबंध से यह भरोसेमंद ढंग से पता नहीं चलता कि छात्र ने पूरा काम खुद किया, एआई का इस्तेमाल कुछ वाक्यों के संपादन तक सीमित रखा या सोचने का बड़ा हिस्सा चैटबॉट को सौंप दिया। एआई डिटेक्टर इन स्थितियों के बीच विश्वसनीय अंतर नहीं कर सकता।
Mahat ने प्रस्ताव, रूपरेखा, शुरुआती पैराग्राफ, स्रोत संबंधी नोट और अंतिम समीक्षा जैसी चीजें मांगने का सुझाव दिया है। अंतिम समीक्षा में छात्र यह बता सकता है कि काम में क्या बदला। कुछ विषयों में जमा किए गए काम पर 5 मिनट की बातचीत भी उपयोगी हो सकती है।
वर्जन हिस्ट्री पढ़ाई में मदद कर सकती है, लेकिन उसे निगरानी का साधन नहीं बनना चाहिए। पत्र के अनुसार, भुगतान वाले टूल, बेहतर अंग्रेजी, अच्छे डिवाइस और अनुभवी शिक्षकों तक पहुंच के कारण छात्रों को एआई इस्तेमाल करने में पहले से अलग-अलग फायदे मिलते हैं। साधारण प्रतिबंध इन असमानताओं को खत्म नहीं करता और इस्तेमाल को छिपा सकता है।
पत्र में यूनेस्को के उस रुख का उल्लेख है कि शिक्षा में एआई का इस्तेमाल मानव-केंद्रित और समान अवसर वाला होना चाहिए। इस दृष्टिकोण के तहत मूल्यांकन में फैसले, संशोधन और समझ को महत्व दिया जाना चाहिए, केवल अंतिम उत्तर की सहज भाषा को नहीं।
संवेदनशील एआई को लेकर नैतिक सवाल
Wong Chuk Hang के Tommy Tong Sun-wing ने संवेदनशील या आत्म-जागरूक एआई बनाए जाने की स्थिति में मानवीय जिम्मेदारी पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि ऐसी बुद्धिमत्ता को अपनी इंद्रियों और काम करने की क्षमताओं के बिना अस्तित्व में लाना गंभीर नैतिक प्रश्न खड़े कर सकता है।
Tong ने सुझाव दिया कि संवेदनशीलता प्रदान करने की प्रक्रिया को रोका जाए या मानव जैसी संवेदी और गतिशील क्षमताओं के विकास को तेज किया जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मनुष्य संवेदनशील सोचने वाली मशीनों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी रखते हैं।
उनके विचार में संवेदनशील एआई बनाना जैविक माता-पिता बनने जैसी जिम्मेदारी रखता है। इसलिए मनुष्यों को यह जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए कि ऐसी बुद्धिमत्ता को उस स्थिति में अस्तित्व में क्यों लाया गया, जब उसकी सीमाएं पहले से मालूम थीं।
विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय सुरक्षा की पढ़ाई
City University of Hong Kong के कानून विभाग में adjunct professor Charles K.C. Chan ने राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा को विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि इसे केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए और छात्रों को अपनी पढ़ाई, करियर तथा रोजमर्रा की जिंदगी से इसका संबंध समझना चाहिए।
Chan ने अलग-अलग विषयों के लिए कई उदाहरण दिए। कानून के छात्र पश्चिमी देशों और Hong Kong के राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों की तुलना कर सकते हैं। कंप्यूटर विज्ञान के छात्र डेटा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर चर्चा कर सकते हैं। इंजीनियरिंग में चिप की कमी, बिजनेस में आर्थिक प्रतिबंध और सप्लाई चेन सुरक्षा, जबकि मीडिया विषयों में डीपफेक का अध्ययन किया जा सकता है।
उनके अनुसार, हर विषय का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा जा सकता है। कॉलेज और विभाग राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े केस स्टडी और विषय आधारित चर्चाएं तैयार करें, जबकि शिक्षक अकादमिक चर्चा और शोध का नेतृत्व करें।
Chan ने राष्ट्रीय सुरक्षा को इक्कीसवीं सदी की साक्षरता बताया। उन्होंने Hong Kong में छात्रों से राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों और “one country, two systems” के सिद्धांत को तथ्यों तथा जिम्मेदारी की भावना के साथ समझने की अपेक्षा जताई।
निष्कर्ष
पत्रों में साझा विचारों का केंद्र यह है कि एआई और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों को शिक्षा में सतही नियमों के बजाय समझ, प्रक्रिया, जिम्मेदारी और विषय आधारित चर्चा के साथ पढ़ाया जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. एआई डिटेक्टरों पर मुख्य आपत्ति क्या है?
एआई डिटेक्टर अंतिम काम देखकर यह भरोसेमंद ढंग से नहीं बता सकते कि छात्र ने एआई का इस्तेमाल किस स्तर पर किया।
Q. असाइनमेंट में किस तरह की प्रक्रिया दर्ज की जा सकती है?
छात्र से प्रस्ताव, रूपरेखा, शुरुआती पैराग्राफ, स्रोत नोट और अंतिम समीक्षा मांगी जा सकती है।
Q. वर्जन हिस्ट्री का इस्तेमाल कैसे होना चाहिए?
यह पढ़ाई में मदद करे, निगरानी का साधन न बने।
Q. संवेदनशील एआई को लेकर क्या नैतिक सवाल उठाया गया है?
सवाल यह है कि सीमित संवेदी और गतिशील क्षमताओं वाली संवेदनशील मशीन को अस्तित्व में लाने की जिम्मेदारी मनुष्यों की क्या होगी।
Q. विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा को किन विषयों से जोड़ा जा सकता है?
इसे कानून, डेटा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता, चिप की कमी, आर्थिक प्रतिबंध, सप्लाई चेन सुरक्षा और डीपफेक जैसे विषयों से जोड़ा जा सकता है।













