बैंकिंग में एआई एजेंट के इस्तेमाल से फैसले लेने और ग्राहक सेवाओं का तरीका बदल सकता है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और जवाबदेही की नई चुनौतियां भी सामने आएंगी। मुंबई में बिजनेस स्टैंडर्ड BFSI समिट के सत्र 'ऑटोनॉमस बैंकिंग एंड सिक्योरिटी' में बैंकिंग क्षेत्र के नेताओं ने एआई एजेंट की पहचान, लेनदेन की निगरानी और मानवीय नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया।
एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और चीफ इन्फॉर्मेशन ऑफिसर रमेश लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि एजेंटिक बैंकिंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, बैंकों को इस बदलाव के लिए तैयार होना होगा और एआई एजेंट को भी इंसान की तरह प्रमाणित करना पड़ेगा।
लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि स्पष्ट नियामकीय ढांचा बनने तक बैंकों को अपनी प्रक्रियाएं विकसित करनी होंगी। उनके मुताबिक, संस्थानों को स्वायत्त एजेंट से मिलने वाली सुविधा और उससे जुड़े जोखिम के बीच संतुलन बनाना होगा। संदिग्ध गतिविधि पहचानने के लिए लेनदेन की निगरानी भी लगभग वास्तविक समय में मजबूत करनी होगी।
भुगतान में गलती होने पर जवाबदेही किसकी
बैंकिंग अधिकारियों के अनुसार, सबसे अहम सवाल तब उठेगा जब कोई ग्राहक भुगतान या दूसरी बैंकिंग गतिविधि के लिए एआई एजेंट को मंजूरी दे, लेकिन एजेंट बाद में उम्मीद से अलग काम कर दे। ऐसी स्थिति में एजेंट की कार्रवाई की अंतिम जिम्मेदारी बैंक पर लौट सकती है।
पंजाब नेशनल बैंक के निदेशक राजेश प्रसाद ने कहा कि जोखिम प्रबंधन बैंकिंग कारोबार का मूल हिस्सा है। उन्होंने कर्ज का उदाहरण देते हुए बताया कि सावधानियां बरतने के बाद भी कर्ज खराब होने पर जिम्मेदारी बैंक की रहती है। उनके मुताबिक, एआई का इस्तेमाल स्वायत्त बैंकिंग बढ़ाने के साथ लेनदेन पर नजर रखने के लिए भी किया जा सकता है।
प्रसाद ने कहा कि बैंक ग्राहक के लेनदेन के पैटर्न का अध्ययन कर रहे हैं। इसमें लेनदेन की भौगोलिक स्थिति और उसकी आवृत्ति जैसे पहलू शामिल हैं। यह निगरानी असामान्य गतिविधियों को पहचानने में मदद कर सकती है, लेकिन किसी भुगतान को तुरंत धोखाधड़ी घोषित करना अलग बात होगी।
ग्राहक अनुभव में बड़ा बदलाव
एक्सिस बैंक के ग्रुप हेड ऑफ डिजिटल बिजनेस, ट्रांसफॉर्मेशन एंड स्ट्रैटेजिक प्रोग्राम्स समीर शेट्टी ने कहा कि एआई का असर पारंपरिक बैंकिंग से डिजिटल बैंकिंग में हुए बदलाव से भी गहरा हो सकता है। एआई केवल मौजूदा प्रक्रिया को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि कुछ फैसले लेकर काम भी कर सकेगा।
शेट्टी के अनुसार, इससे बैंक अपने कई आंतरिक काम स्वचालित कर सकते हैं और ग्राहकों के लिए बैंकिंग सरल हो सकती है। मौजूदा डिजिटल प्रक्रियाओं में ग्राहक को फॉर्म भरने, तय क्रम में जानकारी देने और कई प्रमाणीकरण चरण पूरे करने पड़ते हैं। एआई इन जटिलताओं का बड़ा हिस्सा संभाल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहक अलग-अलग बैंकों से अपनी जरूरत के उत्पाद चुन सकते हैं, बजाय इसके कि उनकी सभी बैंकिंग जरूरतें एक ही संस्था से जुड़ी रहें। हालांकि, ग्राहक की ओर से उसके क्रेडेंशियल और निर्देशों के साथ काम करने वाले एआई एजेंट की निगरानी बैंकों के लिए कठिन चुनौती होगी।
हर काम के लिए अलग नियंत्रण
भारत कारोबार के लिए एक्सेंचर में टेक्नोलॉजी सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर पारितोष वेचलकर ने कहा कि बैंकों को यह तय करना होगा कि कौन-से काम एआई एजेंट सीमित दायरे में कर सकते हैं और किन फैसलों में ज्यादा निगरानी जरूरी है।
दस्तावेज जुटाना, उनकी समीक्षा करना और जानकारी का सत्यापन करना नियंत्रित दायरे वाले काम हो सकते हैं। इसके विपरीत, किसी एजेंट का अपने स्तर पर कर्ज मंजूर करना ज्यादा जोखिम वाला फैसला होगा। इसी तरह संभावित धोखाधड़ी वाला लेनदेन पहचानना और उसे निश्चित रूप से धोखाधड़ी घोषित करना एक जैसा काम नहीं है। कोई वैध भुगतान भी असामान्य दिखाई दे सकता है।
वेचलकर के मुताबिक, हर उपयोग के मामले से जुड़े जोखिम का आकलन कर उसके अनुसार सुरक्षा उपाय तय करने होंगे। बैंक को यह भी पता होना चाहिए कि किस एजेंट ने कार्रवाई की, उसे ऐसा करने की अनुमति थी या नहीं और उसने किन परिस्थितियों में काम किया। इसके लिए पहचान और पहुंच नियंत्रण के साथ निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
स्वायत्त बैंकिंग की दिशा में अगला चरण
बिजनेस नेक्स्ट के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशांत सिंह ने कहा कि बैंकों को अलग-अलग एआई प्रयोगों से आगे की योजना बनानी होगी। उनके अनुसार, पूरी तरह स्वायत्त संचालन की दिशा में बढ़ने से पहले संज्ञानात्मक बैंकिंग का चरण आएगा, जिसमें अलग-अलग प्रक्रियाओं की जानकारी मिलकर फैसलों को प्रभावित करेगी।
सिंह ने स्पष्ट किया कि एजेंटिक एआई अपने आप में स्वायत्त बैंकिंग नहीं है। बैंकों को धीरे-धीरे एआई सिस्टम को अधिक जिम्मेदारी देने के साथ शासन व्यवस्था भी विकसित करनी होगी। भविष्य में ग्राहकों के अपने एआई एजेंट बैंकों की प्रणालियों से जुड़ेंगे, इसलिए उनकी पहचान और उन्हें मिले अधिकार तय करना जरूरी होगा।
बैंकों को यह व्यवस्था भी बनानी होगी कि किसी समस्या की स्थिति में एजेंट के अधिकार वापस लिए जा सकें और उसकी गतिविधि रोकी जा सके। सिंह ने ऐसे आपात नियंत्रण को व्यापक सुरक्षा ढांचे का हिस्सा मानने पर जोर दिया, न कि केवल एक अलग सुविधा के रूप में।
निष्कर्ष
एआई एजेंट बैंकिंग को तेज और अधिक सहज बना सकते हैं, लेकिन उनका बढ़ता अधिकार बैंकों से मजबूत पहचान, निगरानी, सीमित अनुमति और जवाबदेही की मांग करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वायत्त बैंकिंग की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तकनीकी क्षमता के साथ मानवीय निगरानी और स्पष्ट शासन व्यवस्था भी जरूरी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. बैंकिंग में एआई एजेंट क्या कर सकते हैं?
एआई एजेंट ग्राहक सेवाओं को सरल बनाने, कुछ फैसले लेने, दस्तावेजों की समीक्षा करने और लेनदेन की निगरानी में मदद कर सकते हैं।
Q. एआई एजेंट की पहचान क्यों जरूरी है?
बैंक को यह पता होना चाहिए कि किस एजेंट ने कार्रवाई की और उसे वह काम करने की अनुमति थी या नहीं।
Q. ग्राहक की ओर से काम करने वाले एजेंट की चुनौती क्या है?
ऐसे एजेंट ग्राहक के क्रेडेंशियल और निर्देशों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उनकी गतिविधियों और अधिकारों की निगरानी करना बैंकों के लिए जटिल होगा।
Q. क्या हर एआई काम के लिए समान निगरानी चाहिए?
नहीं। दस्तावेजों की समीक्षा जैसे सीमित काम और कर्ज मंजूर करने जैसे फैसलों में जोखिम का स्तर अलग होता है।
Q. संदिग्ध लेनदेन और धोखाधड़ी में क्या अंतर है?
किसी लेनदेन का असामान्य दिखना उसे निश्चित रूप से धोखाधड़ी साबित नहीं करता, क्योंकि वैध भुगतान भी असामान्य लग सकता है।
Q. समस्या होने पर बैंक क्या कर सकेंगे?
बैंकों को एजेंट की गतिविधि रोकने और उसके अधिकार वापस लेने की व्यवस्था बनानी होगी।
Q. क्या एजेंटिक एआई ही स्वायत्त बैंकिंग है?
नहीं। एजेंटिक एआई स्वायत्त बैंकिंग की दिशा में एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन दोनों को समान नहीं माना गया।




