तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI में शामिल हुए 20 सांसदों की अयोग्यता से जुड़ा मामला फिर टल गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से जवाब देने के लिए दी गई नई समयसीमा भी बीत गई, जबकि सांसदों ने 2 और सप्ताह का समय मांगा है। इस मांग पर आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सायोनी घोष और यूसुफ पठान के अलावा काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और जगदीश चंद्र वर्मा बासुनिया का नाम उन सांसदों में शामिल है, जो तृणमूल से अलग होकर NCPI में चले गए थे। लोकसभा के रिकॉर्ड्स में ये सांसद अभी भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं।
जवाब के लिए पहले भी मिल चुका है अतिरिक्त समय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसदों को जवाब देने के लिए गुरुवार तक का समय मिला था। इससे पहले उन्हें 7 दिनों की मोहलत दी गई थी। इसके बाद 3 सप्ताह और फिर 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया। अब बागी सांसदों की ओर से 2 और सप्ताह मांगे जाने की खबर है।
22 सितंबर को काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा सचिवालय को और समय देने के लिए पत्र भेजे जाने की बात कही थी। उनके अनुसार, 20 सांसदों को जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए था। उन्होंने 4 सप्ताह की मोहलत मांगे जाने की जानकारी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
इन सांसदों के दल बदल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में उन्हें सांसद के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की गई। तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने जून में दसवीं अनुसूची के तहत लोकसभा अध्यक्ष के सामने इस संबंध में याचिकाएं दाखिल की थीं।
23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि पीठ लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकती, लेकिन वह मामले के जल्द निपटारे की याद दिला सकती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था कि जिस मामले में शीघ्र फैसले की जरूरत है, उस पर तेजी से कार्रवाई की उम्मीद है।
जस्टिस बागची ने भी दसवीं अनुसूची के महत्व को देखते हुए मामले का जल्द समाधान करने की बात कही थी। अदालत ने केशम मेघचंद्र सिंह बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष मामले का संदर्भ दिया था। 2020 के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अध्यक्ष को उचित समय के भीतर फैसला लेना चाहिए और बेहतर होगा कि यह प्रक्रिया 3 महीनों के अंदर पूरी हो।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है
20 सांसदों की सदस्यता को लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है। एक ओर उनके खिलाफ अयोग्यता की मांग लंबित है, वहीं लोकसभा रिकॉर्ड्स में उनका नाम तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के रूप में दर्ज है। इसलिए अगला प्रमुख कदम लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होने वाला फैसला है।
सांसदों की ओर से मांगी गई नई मोहलत स्वीकार हुई है या नहीं, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में आधिकारिक पुष्टि नहीं है। इसी वजह से जवाब दाखिल करने और अयोग्यता पर निर्णय की स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
निष्कर्ष
सायोनी घोष समेत 20 सांसदों से जुड़ा अयोग्यता विवाद अभी लोकसभा अध्यक्ष के सामने लंबित है। जवाब देने की समयसीमा फिर बीतने और 2 और सप्ताह मांगने की खबर के बीच सुप्रीम कोर्ट की जल्द निर्णय की टिप्पणी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. इस मामले में कितने सांसद शामिल हैं?
20 सांसदों के दल बदल और संभावित अयोग्यता से जुड़ा मामला लंबित है।
Q. इन सांसदों ने किस दल में शामिल होने की बात सामने आई है?
स्रोत के अनुसार, वे तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI में शामिल हुए हैं।
Q. लोकसभा रिकॉर्ड्स में इन सांसदों की स्थिति क्या है?
लोकसभा के रिकॉर्ड्स में उन्हें तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है।
Q. सांसदों ने कितना अतिरिक्त समय मांगा है?
उनकी ओर से 2 और सप्ताह की मोहलत मांगे जाने की खबर है।
Q. अयोग्यता की मांग किसने की थी?
तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के सामने दसवीं अनुसूची के तहत याचिकाएं दायर की थीं।
Q. सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
अदालत ने मामले का जल्द समाधान किए जाने की जरूरत पर जोर दिया था।
Q. इस मामले में अंतिम फैसला किसे लेना है?
सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले पर निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होना है।







