पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद शुक्रवार को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल से रावलपिंडी की अडियाला जेल वापस भेज दिया गया। अस्पताल में 6 डॉक्टरों की टीम ने उनकी जांच की। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है और जेल में उनकी देखभाल की जा सकती है।

गुरुवार देर रात इमरान खान को जेल से अस्पताल लाया गया था। उनके पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। अस्पताल की सभी लाइटें बंद रखी गईं, जबकि कर्मचारियों के मोबाइल फोन जमा करा लिए गए। परिसर के बाहर मौजूद मीडिया को भी वहां से हटाया गया। जांच पूरी होने के बाद उन्हें सुरक्षा घेरे में जेल ले जाया गया।

इसी मामले में पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दोबारा समीक्षा याचिका दाखिल की। सरकार चाहती है कि इमरान खान को इलाज के लिए निजी अस्पताल भेजने से जुड़े आदेश में बदलाव किया जाए। इससे पहले दाखिल याचिका जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने लौटा दी थी।

इमरान खान के वकील खालिद यूसुफ चौधरी ने कहा कि जेल प्रशासन ने उन्हें इमरान से मिलने की अनुमति नहीं दी। उनका कहना है कि उन्हें अवमानना याचिका और पावर ऑफ अटॉर्नी पर इमरान के हस्ताक्षर कराने थे। चौधरी ने आरोप लगाया कि मुलाकात रोकने का मकसद इलाज से संबंधित अवमानना याचिका दाखिल करने में बाधा डालना था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी।

कोर्ट में पेश मेडिकल रिपोर्ट में ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, तेज धड़कन और मानसिक तनाव की बात कही गई थी। हालिया जांच में उनका ब्लड प्रेशर 140/80 और नब्ज 54 बार प्रति मिनट दर्ज हुई। फरवरी में ब्लड प्रेशर 120/80 था।

सुप्रीम कोर्ट ने इमरान की सेहत जांचने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया है। इसमें उनकी बहन डॉ. उजमा खान और निजी डॉक्टर को शामिल किया जाएगा। बोर्ड विशेषज्ञों के साथ पुरानी रिपोर्ट देखेगा और यह तय करेगा कि इलाज जेल में संभव है या अस्पताल जरूरी है।

73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा के बाद गिरफ्तार किया गया था। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में राहत मिली, जबकि दिसंबर 2025 में तोशाखाना से जुड़े दूसरे मामले में उन्हें और बुशरा बीबी को 17-17 साल की सजा सुनाई गई।

इमरान और उनकी पार्टी पीटीआई मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताती है। पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इस आरोप को खारिज कर इन्हें कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती हैं।