होर्मुज संकट के बीच समुद्री जहाजों की आवाजाही को लेकर कई रिपोर्ट सामने आई हैं। इनमें दावा किया गया है कि 80% जहाजों ने होर्मुज जलमार्ग से गुजरने के बजाय वैकल्पिक रास्ता अपनाया।

रिपोर्टों में इस बदलाव को ईरान की कथित नाकेबंदी के असर से जोड़कर देखा गया है। हालांकि उपलब्ध सामग्री में जहाजों की कुल संख्या, वैकल्पिक मार्ग और इस बदलाव की अवधि का विवरण नहीं दिया गया है।

समुद्री रास्ते को लेकर क्या दावा है

एक रिपोर्ट में ट्रैकिंग फर्म के हवाले से कहा गया है कि होर्मुज से गुजरने वाले 80% जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया। दूसरी रिपोर्ट में इसी आधार पर ईरान के होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन जहाजों ने कौन-से रास्ते अपनाए या बदलाव से समुद्री परिवहन पर क्या असर पड़ा। इसलिए अभी सामने आया मुख्य तथ्य जहाजों के मार्ग बदलने का दावा है।

इस घटनाक्रम से जुड़ी रिपोर्टों में निम्न बातें कही गई हैं:

  • 80% जहाजों के होर्मुज जलमार्ग को बायपास करने का दावा किया गया है।
  • एक ट्रैकिंग फर्म को इस दावे का आधार बताया गया है।
  • रिपोर्टों में ईरान की कथित नाकेबंदी और उसके असर पर चर्चा है।
  • जहाजों की कुल संख्या और बदले गए मार्गों का विवरण उपलब्ध नहीं है।

ट्रंप और ईरान के बीच बातचीत

अलग रिपोर्टों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के बीच संभावित समझौते का भी उल्लेख है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि ईरान को पहले समझौते के लिए तैयार होना होगा, तभी बातचीत आगे बढ़ेगी।

इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप ने अपनी टीम से वार्ता रोकने को कहा। उपलब्ध सामग्री में इस निर्देश का समय, बातचीत में शामिल पक्षों या समझौते की शर्तों का विस्तृत ब्योरा नहीं है।

एक अन्य रिपोर्ट के शीर्षक में ओमान को बम की धमकी दिए जाने का सवाल उठाया गया है। उपलब्ध सामग्री इस दावे का विस्तृत विवरण या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया नहीं देती।

रिपोर्टों में ईरान की ओर से अमेरिका पर जोरदार हमले की योजना बनाए जाने का भी दावा किया गया है। इस दावे के साथ किसी योजना, स्थान या समय की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

फिलहाल उपलब्ध खबरों में समुद्री मार्ग बदलने के दावे और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर सख्त रुख, दोनों का उल्लेख है। इन दावों की पूरी तस्वीर के लिए जहाजों की आवाजाही और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों की विस्तृत जानकारी जरूरी होगी।