नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को हुए BRICS समिट में भारत ने ऐसे समय संगठन के भीतर सहमति बनाने की कोशिश की, जब सदस्य देश अलग-अलग युद्धों और गंभीर भू-राजनीतिक मतभेदों से जूझ रहे थे। समिट का साझा घोषणापत्र सर्वसम्मति से पास हुआ।
भारत के लिए यह सिर्फ एक औपचारिक दस्तावेज नहीं था। इसमें पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा, पश्चिम एशिया में संयम की अपील और ग्लोबल साउथ के साझा मुद्दों पर सहयोग का रुख सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
भारत की 5 प्रमुख कूटनीतिक उपलब्धियां
# ईरान और UAE को संवाद के लिए एक मंच
पश्चिम एशिया की जंग BRICS के सामने सबसे कठिन मुद्दों में रही। ईरान और UAE का इस विषय पर रुख अलग-अलग है। पहले पश्चिम एशिया को लेकर मतभेदों के कारण BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में साझा बयान जारी नहीं हो पाया था।
नई दिल्ली समिट में दोनों देश साझा घोषणापत्र पर साथ आए। उन्होंने पश्चिम एशिया में संयम बरतने की अपील का समर्थन किया। समिट से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात भी हुई। इसे जंग शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की मुलाकात बताया गया।
# साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति
BRICS के विस्तार के बाद संगठन में अलग-अलग देशों के हित और राजनीतिक रुख शामिल हुए हैं। ऐसे माहौल में साझा दस्तावेज पर सहमति बनाना मुश्किल था। इसके बावजूद नई दिल्ली समिट में घोषणापत्र सर्वसम्मति से पास हुआ।
घोषणापत्र में वैश्विक शासन, विकास, व्यापार, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), सप्लाई चेन और अन्य मुद्दों पर सहयोग की बात कही गई। दस्तावेज में भारत की BRICS अध्यक्षता की तारीफ भी की गई।
# पहलगाम हमले की सामूहिक निंदा
घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। इसमें आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रुख दोहराया गया। आतंकियों, उन्हें समर्थन देने वालों और आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराने की बात भी कही गई।
घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पहलगाम हमले को सीधे आतंकी हमला बताया गया। चीन की मौजूदगी वाले मंच पर इस तरह की सामूहिक निंदा भारत के लिए अहम कूटनीतिक उपलब्धि रही।
# BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी मंच बनने से रोका
भारत के सामने यह चुनौती भी थी कि BRICS चीन और रूस के प्रभाव वाला अमेरिका-विरोधी मंच न बन जाए। रूस पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध हैं। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार तथा वैश्विक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा भी है।
भारत ने विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन संगठन को सीधे पश्चिम-विरोधी मंच नहीं बनने दिया। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की ज्यादा भागीदारी और अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था की बात रखी गई।
# मतभेदों के बीच संगठन को एकजुट रखा
BRICS सदस्य देशों की राजनीतिक सोच, आर्थिक प्राथमिकताएं और बाहरी रिश्ते अलग-अलग हैं। रूस-यूक्रेन की जंग और ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष का असर भी संगठन के भीतर दिखता है। इसके बावजूद घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के लिए संयम, बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया गया।
सदस्य देशों के अलग-अलग राष्ट्रीय रुख को जगह देते हुए आर्थिक सहयोग के साझा क्षेत्रों पर भी जोर रहा। सप्लाई चेन, विकास, टेक्नोलॉजी और वित्त जैसे मुद्दों ने देशों को साझा आधार दिया।
आगे की चुनौती
भारत की अध्यक्षता के बाद BRICS की अगली बड़ी चुनौती चीन के सामने होगी। 2027 में संगठन की अध्यक्षता चीन के पास होगी। नई दिल्ली समिट का अनुभव दिखाता है कि अलग-अलग मतभेदों के बावजूद साझा घोषणापत्र और सहयोग का रास्ता बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
भारत ने BRICS समिट में सहमति, संवाद और ग्लोबल साउथ के मुद्दों को साथ रखते हुए अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत की। अब इस साझा रुख को आगे बनाए रखना अगली अहम चुनौती होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. BRICS समिट में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
नई दिल्ली में साझा घोषणापत्र पर सर्वसम्मति बनाना भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रहा।
Q. क्या घोषणापत्र में पहलगाम हमले का जिक्र हुआ?
हां, घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई।
Q. भारत ने ईरान और UAE के लिए क्या भूमिका निभाई?
भारत ने BRICS मंच के जरिए दोनों देशों को संवाद और संयम की अपील के साझा रुख तक पहुंचने का अवसर दिया।
Q. BRICS घोषणापत्र में किन मुद्दों पर सहयोग की बात हुई?
घोषणापत्र में विकास, व्यापार, डिजिटल टेक्नोलॉजी, AI, सप्लाई चेन और वैश्विक शासन जैसे मुद्दे शामिल रहे।
Q. क्या BRICS अमेरिका-विरोधी मंच बना?
भारत ने संगठन को सीधे अमेरिका-विरोधी मंच बनने से रोकते हुए विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर फोकस रखा।
Q. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कितनी द्विपक्षीय बैठकें कीं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं।
Q. 2027 में BRICS की अध्यक्षता किसके पास होगी?
2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन के पास होगी।













