अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में अब परमाणु हमले की चर्चा केंद्र में है। अमेरिका की पूर्व कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने दावा किया था कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ परमाणु हमले पर विचार कर रहे हैं। इस दावे के बाद ईरान की ओर से तीखी चेतावनियां सामने आई हैं।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य फिदा हुसैन मलेकी ने कहा कि वह ट्रंप की किसी संभावित कार्रवाई को पूरी तरह खारिज नहीं करते। हालांकि, उनका मानना है कि ऐसा कदम दुनिया को विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल सकता है।
संभावित अमेरिकी परमाणु हमले के जवाब पर मलेकी ने कहा कि ईरान उसी हथियार और उसी स्तर पर प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जिस तरह के हथियार का इस्तेमाल करेगा, ईरान का जवाब उसी स्तर का होगा।
मलेकी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान के पास इस समय परमाणु बम तैयार है या नहीं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास कई खतरनाक और आधुनिक हथियार हैं, जिनके बारे में दुनिया को अभी जानकारी नहीं है।
# खाड़ी देशों पर भी दबाव
परमाणु हमले की आशंकाओं के बीच सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों में चिंता बढ़ने की बात कही गई है। इस चिंता की एक वजह ईरानी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही की चेतावनी है।
अब्दुल्लाही ने उन खाड़ी देशों के दावे पर सवाल उठाया कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को नहीं करने देंगे। उन्होंने पूछा कि यदि ये देश संघर्ष में शामिल नहीं हैं, तो उनके एयरबेस पर अमेरिकी लड़ाकू विमान और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर क्यों मौजूद हैं।
ईरानी जनरल ने कहा कि अमेरिकी सेना को किसी भी तरह की सुविधा या मदद देने वाले खाड़ी देश अमेरिका के सहयोगी माने जाएंगे। उनके बयान का आशय यह है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद किसी अमेरिकी बेस से ईरान पर हमला हुआ, तो संबंधित देशों को भी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ईरानी पक्ष के अनुसार, परमाणु हमला या अमेरिकी सेना को खाड़ी देशों की मदद संघर्ष को दो देशों तक सीमित नहीं रहने देगा। इस स्थिति में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई गई है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही गई है।



