वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत के अगले बड़े निवेश का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (AI infrastructure) पर होना चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र में निवेश धीमा करने की अपीलों के बावजूद भारत के लिए ज्यादा क्षमता बनाने की जरूरत बताई।
सीतारमण ने यह बात शनिवार को Bengaluru में IIT Madras की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उनके मुताबिक, भारत को एआई से जुड़े हार्डवेयर के साथ-साथ ऐसे शिक्षकों और प्रशिक्षकों की भी जरूरत है, जो संस्थानों में लगातार नई जानकारी पहुंचा सकें।
एमएसएमई के लिए एआई का महत्व
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज यानी MSMEs अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये इकाइयां पिन से लेकर विमान के पुर्जों तक कई तरह के उत्पाद बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि इन कारोबारों को ऐसे एआई समाधान और प्रशिक्षण चाहिए, जिनसे उनकी उत्पादकता बढ़े और वे दूसरे देशों की कंपनियों से बेहतर मुकाबला कर सकें। उनके अनुसार, भारत को यह क्षमता अपने कारोबारों तक पहुंचानी होगी।
सीतारमण ने कहा कि पश्चिमी देशों ने एआई में काफी प्रगति की है, लेकिन भारत भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि भारत को एआई विकास की रफ्तार रोक देनी चाहिए।
एआई सुरक्षा पर अलग राय
उनकी टिप्पणी Anthropic के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Dario Amodei की उस अपील के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें एआई मॉडल की क्षमताएं बढ़ाने की गति धीमी करने की बात कही गई थी। इस अपील के पीछे एआई सिस्टम पर नियंत्रण खोने, साइबर हमलों और जैव-आतंकवाद में दुरुपयोग तथा बड़े आर्थिक नुकसान का जोखिम बताया गया था।
इस रुख का समर्थन एआई उद्योग से जुड़े Elon Musk, Sam Altman, Satya Nadella और Demis Hassabis ने भी किया था।
कंपनियों की लिस्टिंग और फंडिंग
सीतारमण ने भारत में एआई को लेकर बनी उस धारणा पर भी असहमति जताई कि देश में इस क्षेत्र में पर्याप्त गतिविधि नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि इसका एक पैमाना यह भी है कि कितनी एआई कंपनियां NSE और BSE के बोर्ड पर सूचीबद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनियों की लिस्टिंग से उन्हें कुछ फायदे मिलते हैं और कई लिस्टिंग यह संकेत देती हैं कि क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम हो रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इनोवेटिव लोगों को खुद फंडिंग तलाशने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।
उनके मुताबिक, इन कंपनियों को ऐसे साझेदार चाहिए जो केवल शुरुआती या अंतिम चरण की फंडिंग पर ध्यान न दें, बल्कि लिस्टिंग की संभावना पर भी विचार करें।
निष्कर्ष
सीतारमण का संदेश यह है कि भारत में एआई का विस्तार केवल मॉडल बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए हार्डवेयर, प्रशिक्षण, कारोबारों तक पहुंच और कंपनियों के लिए बेहतर फंडिंग ढांचे पर भी ध्यान जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. निर्मला सीतारमण ने एआई निवेश पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत के अगले बड़े निवेश का केंद्र एआई इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए।
Q. एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में किन चीजों की जरूरत बताई गई?
सीतारमण ने हार्डवेयर और संस्थानों में लगातार एआई प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों की जरूरत बताई।
Q. एमएसएमई के लिए एआई क्यों महत्वपूर्ण है?
एआई समाधान एमएसएमई की उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति देने में मदद कर सकते हैं।
Q. एआई विकास धीमा करने की अपील किसने की थी?
Anthropic के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Dario Amodei ने एआई मॉडल की क्षमताएं बढ़ाने की गति धीमी करने की अपील की थी।
Q. किन लोगों ने इस अपील का समर्थन किया?
Elon Musk, Sam Altman, Satya Nadella और Demis Hassabis ने इस रुख का समर्थन किया था।
Q. सीतारमण ने एआई कंपनियों की लिस्टिंग पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि लिस्टिंग से फायदे मिलते हैं और कई लिस्टिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण गतिविधि का संकेत दे सकती हैं।












