भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार में लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी ओमेक्स और 5 अन्य पक्षों पर सिक्योरिटी मार्केट में कारोबार करने से रोक लगा दी है। नियामक ने न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी (Minimum Public Shareholding) की शर्त कृत्रिम तरीके से पूरी करने के मामले में यह कार्रवाई की है।
सेबी ने इस मामले में कुल 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ओमेक्स पर सिक्योरिटी मार्केट में प्रवेश की रोक 3 महीने के लिए लागू होगी। कंपनी से जुड़े अन्य पक्षों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
किन लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई हुई
सेबी के आदेश के अनुसार, ओमेक्स के प्रमोटर रोहतास गोयल और जय भगवान गोयल पर एक साल की रोक लगाई गई है। समूह की कंपनियों ड्रीम होम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और गिल्ड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड पर भी यही प्रतिबंध लागू होगा।
ओमेक्स के पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक सुनील गोयल को भी एक साल के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया गया है।
सेबी की आपत्ति क्या है
नियामक के मुताबिक, ओमेक्स स्वतंत्र सार्वजनिक शेयरधारकों के जरिये निर्धारित 25% न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करने में विफल रही। सेबी ने कहा कि कुछ संस्थाओं ने ओमेक्स के शेयर ऐसे फंड से खरीदे, जो कंपनी या उसकी समूह इकाइयों से आया था।
इन संस्थाओं को शेयर खरीदने के लिए रकम उपलब्ध कराई गई। इसके बाद उन्हें सार्वजनिक शेयरधारकों के तौर पर दिखाया गया। सेबी के अनुसार, इससे कंपनी ने सार्वजनिक हिस्सेदारी की नियामकीय शर्त पूरी होने का कृत्रिम आभास बनाया।
46.50 करोड़ रुपये के फंड ट्रांसफर का मामला
सेबी के अनुसार, ओमेक्स और उसकी समूह कंपनियों ने डीवीएम रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, गर्व बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और जीत बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिये कुल 46.50 करोड़ रुपये भेजे। इस रकम का इस्तेमाल ओमेक्स के शेयर खरीदने में हुआ।
ये खरीद 3 जून, 2013 और 29 अक्टूबर, 2013 को हुई ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के दौरान की गई थीं। नियामक ने कहा कि इन लेनदेन को अलग-अलग फंड ट्रांसफर या स्वतंत्र शेयर खरीद के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सेबी के मुताबिक, पूरी व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी संस्थाओं के जरिये स्वतंत्र सार्वजनिक शेयरधारिता का आभास पैदा करना था, जिनके पास शेयर खरीदने के लिए रकम कंपनी या उसकी समूह इकाइयों से आई थी।
सार्वजनिक हिस्सेदारी पर सेबी का आकलन
सेबी के आदेश में ओमेक्स की घोषित और फंड से खरीदी गई हिस्सेदारी को अलग करने के बाद के आंकड़े भी बताए गए हैं। 3 जून, 2013 की ऑफर फॉर सेल के बाद घोषित सार्वजनिक हिस्सेदारी 16.21% थी। कंपनी से मिले फंड से खरीदी गई हिस्सेदारी हटाने पर यह करीब 14.57% रह जाती।
29 अक्टूबर, 2013 की बिक्री पेशकश के बाद घोषित सार्वजनिक हिस्सेदारी 20.97% थी। सेबी के अनुसार, संबंधित हिस्सेदारी हटाने पर यह करीब 19.04% होती।
निष्कर्ष
सेबी की कार्रवाई का केंद्र ओमेक्स की सार्वजनिक हिस्सेदारी और शेयर खरीद के लिए उपलब्ध कराए गए फंड के बीच संबंध है। आदेश के तहत ओमेक्स पर 3 महीने और अन्य संबंधित पक्षों पर एक साल की बाजार रोक लागू की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. सेबी ने ओमेक्स पर क्या कार्रवाई की?
सेबी ने ओमेक्स को 3 महीने के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया और मामले में जुर्माना लगाया।
Q. ओमेक्स के अलावा किन पक्षों पर रोक लगी?
रोहतास गोयल, जय भगवान गोयल, ड्रीम होम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, गिल्ड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड और सुनील गोयल पर एक साल की रोक लगी।
Q. सेबी ने कितने रुपये का जुर्माना लगाया?
नियामक ने सभी संबंधित पक्षों पर कुल 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
Q. मामला किस नियम से जुड़ा है?
यह मामला 25% न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी की शर्त को पूरा करने से जुड़ा है।
Q. फंड ट्रांसफर की कुल रकम कितनी थी?
सेबी के अनुसार, ओमेक्स और उसकी समूह कंपनियों से 46.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे।











