सऊदी अरब के सैन्य प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया गया। प्रवक्ता के अनुसार, इन मिसाइलों का निशाना लाल सागर के पास स्थित यानबू बंदरगाह और दक्षिण-पश्चिमी शहर ताएफ़ थे।

यह हमला हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच हुआ है। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता और सऊदी मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने इन हमलों के लिए यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया।

जाज़ान पर हमले का हूतियों ने किया दावा

बाद में हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी जाज़ान प्रांत पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इस दावे में सऊदी सैन्य प्रवक्ता की ओर से बताई गई 6 मिसाइलों से अलग संख्या का उल्लेख किया गया है।

हूतियों पर हाल के दिनों में सऊदी अरब के खिलाफ हमले की कोशिशों का आरोप लगता रहा है। इनमें राजधानी रियाद को निशाना बनाने की कोशिश भी शामिल बताई गई है। हालांकि, इस खबर में रियाद पर हुए किसी नए हमले का अलग विवरण नहीं दिया गया है।

सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने सैन्य बयान से पहले लोगों को खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। अधिकारियों ने बाद में कहा कि खतरा टल गया है। सऊदी पक्ष की ओर से जारी विवरण में मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्ट किए जाने की बात कही गई है।

लाल सागर शिपिंग पर बढ़ी चिंता

लड़ाई लाल सागर के अहम शिपिंग कॉरिडोर के पास हो रही है। इसी वजह से इन हमलों ने ग्लोबल मार्केट को लेकर चिंता बढ़ाई है। हूती विद्रोहियों का कहना है कि उनका निशाना केवल सऊदी अरब है और लाल सागर में कमर्शियल शिपिंग को खतरा नहीं है।

इसके साथ ही हूतियों ने दूसरे देशों को संघर्ष में शामिल न होने की चेतावनी दी है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है और क्षेत्रीय तनाव का असर व्यापक चिंता का विषय बना हुआ है।

यमन में मानवीय संकट

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार संयुक्त राष्ट्र में विश्व नेताओं की सालाना बैठक को संबोधित करने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह सैन्य टकराव सामने आया।

यमन को अरब दुनिया का सबसे गरीब देश बताया गया है। ईरान और सऊदी अरब के समर्थन वाली लड़ाई ने करीब 4 साल की अपेक्षाकृत शांति के बाद देश को फिर गृहयुद्ध की ओर धकेला है। संघर्ष के कारण 1,25,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और मानवीय संकट गंभीर बना हुआ है।

सहयोगियों से मदद की कोशिश

सऊदी अरब ने अपने सहयोगियों से सैन्य मदद मांगी है। उसके मुख्य सहयोगी अमेरिका ने कहा है कि वह हूतियों के संपर्क में है और संकेत दिया है कि वह इस लड़ाई से दूर रहेगा।

सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ मक्का पैक्ट पर भी हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, दोनों देशों ने अब तक इस समझौते के नाम पर कोई सक्रिय सहयोग नहीं दिया है।

निष्कर्ष

सऊदी बयान के मुताबिक, 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया गया और खतरा टल गया। हूतियों के अलग दावे तथा लाल सागर के पास जारी तनाव से क्षेत्रीय और मानवीय चिंताएं बनी हुई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. हूतियों ने सऊदी अरब में किन जगहों को निशाना बनाया?

सऊदी सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, यानबू बंदरगाह और ताएफ़ को निशाना बनाया गया। हूतियों ने बाद में जाज़ान प्रांत पर हमले का दावा किया।

Q. सऊदी अरब पर कितनी मिसाइलें दागी गईं?

सऊदी सैन्य प्रवक्ता ने 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी दी। हूतियों ने जाज़ान पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागने का अलग दावा किया।

Q. क्या मिसाइलें सऊदी एयर डिफेंस ने रोक लीं?

सऊदी सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया। नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने बाद में खतरा टलने की बात कही।

Q. इस हमले का लाल सागर पर क्या असर है?

लाल सागर के अहम शिपिंग कॉरिडोर के पास लड़ाई होने से ग्लोबल मार्केट को लेकर चिंता बढ़ी है। हूतियों का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग को खतरा नहीं है।

Q. यमन में संघर्ष से कितने लोग विस्थापित हुए हैं?

यमन में लड़ाई के कारण 1,25,000 से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। देश में मानवीय संकट गंभीर बना हुआ है।

Q. अमेरिका ने इस संघर्ष पर क्या कहा है?

अमेरिका ने कहा है कि वह हूतियों के संपर्क में है। उसने इस लड़ाई से दूर रहने का संकेत दिया है।