कच्चे तेल की कीमत इस हफ्ते करीब 13 फीसदी बढ़कर $108.77 तक पहुंच गई। यह 4 महीने का उच्चतम स्तर है। तेल की सप्लाई में रुकावट और सऊदी अरब के उत्पादन में गिरावट ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

सऊदी अरब का रोजाना क्रूड प्रोडक्शन (Crude Production) 1.9 मिलियन बैरल घटकर 6.2 मिलियन बैरल रह गया है। यह 1990 के बाद देश का सबसे निचला उत्पादन स्तर है। सऊदी अरब ओपेक देशों में क्रूड का सबसे बड़ा उत्पादक है।

सऊदी अरब के एक्सपोर्ट में भी गिरावट

अगस्त में सऊदी अरब के तेल एक्सपोर्ट में 40 फीसदी कमी आई। प्रोविजनल टैंकर ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, उसका एक्सपोर्ट 5.1 मिलियन बैरल से घटकर 3.1 मिलियन बैरल रह गया। उत्पादन और निर्यात, दोनों में यह गिरावट तेल बाजार के लिए अहम है।

भारत पर असर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब भारत का तीसरा बड़ा तेल सप्लायर है। ईरान युद्ध से पहले सितंबर से फरवरी के बीच वहां से भारत को रोजाना 7 लाख 43 हजार बैरल सप्लाई मिलती थी। फरवरी से अगस्त के दौरान यह मात्रा घटकर 4 लाख 40 हजार बैरल रोजाना रह गई।

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव बन सकता है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना बताई गई है।

खाड़ी और लाल सागर में सप्लाई बाधित

ईरान के जहाजों पर हमलों से खाड़ी क्षेत्र में समुद्री ट्रैफिक प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों के तटीय शहर मोचा पर कब्जे के बाद लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बढ़ा है।

मोचा बंदरगाह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास है। यह ग्लोबल शिपिंग के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इन घटनाक्रमों के बीच तेल की सप्लाई टाइट हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।

भारत के लिए आगे का असर

भारत के सामने दोहरा दबाव है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा हुआ है, दूसरी तरफ उसके बड़े सप्लायर्स में शामिल सऊदी अरब से मिलने वाली रोजाना सप्लाई कम हुई है। इससे आयात लागत और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

सऊदी अरब का क्रूड उत्पादन 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचना और समुद्री मार्गों में रुकावट भारत के लिए तेल आयात का दबाव बढ़ा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. कच्चे तेल की कीमत कितनी बढ़ी है?

कच्चे तेल की कीमत इस हफ्ते करीब 13 फीसदी बढ़ी और कारोबार के दौरान $108.77 तक पहुंची।

Q. सऊदी अरब का रोजाना क्रूड प्रोडक्शन कितना रह गया है?

सऊदी अरब का रोजाना उत्पादन घटकर 6.2 मिलियन बैरल रह गया है।

Q. सऊदी अरब का तेल एक्सपोर्ट कितना घटा?

अगस्त में एक्सपोर्ट 5.1 मिलियन बैरल से घटकर 3.1 मिलियन बैरल रह गया।

Q. भारत सऊदी अरब से कितना तेल लेता है?

फरवरी से अगस्त के बीच सऊदी अरब से भारत को रोजाना 4 लाख 40 हजार बैरल सप्लाई मिली।

Q. भारत पर तेल की बढ़ती कीमतों का क्या असर हो सकता है?

भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव बन सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

Q. तेल की कीमतों में तेजी क्यों आई?

खाड़ी और लाल सागर के समुद्री मार्गों में रुकावट और सुरक्षा खतरे से तेल की सप्लाई टाइट हुई है।